बरसात के मौसम में निमाड़ की खास रेसिपी: दही और सुलझने की फली की चटपटी सब्जी बनाने का तरीका जीवनशैली 2 घंटे पहले 6
बरसात के दिनों में निमाड़ अंचल के बुरहानपुर में दही और सुलझने की फली की सब्जी काफी लोकप्रिय है। खट्टी-मीठी और मसालेदार स्वाद वाली इस पारंपरिक डिश को बनाने की आसान विधि यहां जानें।

मानसून में निमाड़ के घरों की खास पसंद

बरसात का मौसम आते ही निमाड़ क्षेत्र के घरों में पारंपरिक व्यंजनों का दौर शुरू हो जाता है। इन व्यंजनों में से एक नाम बुरहानपुर की मशहूर दही और सुलझने की फली की सब्जी का है। यह सब्जी अपने अनोखे खट्टे-मीठे और मसालेदार स्वाद के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की पसंदीदा बनी हुई है। मानसून के दौरान जब मौसम सुहावना होता है, तो निमाड़ के हर रसोई घर में इस सब्जी की खुशबू महसूस की जा सकती है। यह सब्जी न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि इसे बनाना भी काफी सरल है।

सब्जी बनाने की पूरी विधि

इस पारंपरिक व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए एक्सपर्ट वंदना ने बताया कि इसके लिए सबसे पहले सुलझने की फली को ठीक ढंग से साफ करना आवश्यक होता है। सफाई के बाद फलियों को छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। इसके बाद खाना बनाने की शुरुआत एक कड़ाही से होती है जिसमें तेल को गर्म किया जाता है। तेल गर्म होने पर उसमें राई का तड़का लगाया जाता है। जब राई चटकने लगे, तब इसमें बारीक कटा हुआ प्याज, अदरक और लहसुन डालकर सुनहरा होने तक अच्छी तरह भुना जाता है।

मसाला भुन जाने के बाद इसमें लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। जब मसाला तेल छोड़ने लगे, तब कटी हुई सुलझने की फलियों को इसमें डाल दिया जाता है और इन्हें कुछ देर तक पकने दिया जाता है। जब फलियां नरम हो जाएं, तब इसमें फेंटा हुआ दही मिलाया जाता है। दही डालते समय एक विशेष सावधानी बरतनी होती है, जिसे वंदना ने भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दही को कड़ाही में डालते समय इसे लगातार चम्मच से चलाते रहना बहुत जरूरी है। ऐसा करने से दही फटने की संभावना खत्म हो जाती है और सब्जी का टेक्सचर एकदम सही बना रहता है।

स्वाद को कैसे बनाएं और भी बेहतरीन

दही के साथ फलियों के मिल जाने के बाद अंत में स्वादानुसार लाल मिर्च, गरम मसाला और नमक की थोड़ी मात्रा को और जोड़ा जा सकता है। कुछ मिनटों तक धीमी आंच पर पकाने से दही और मसाले फली के साथ पूरी तरह घुल-मिल जाते हैं। इसके बाद आपकी स्वादिष्ट और चटपटी सब्जी परोसने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है।

निमाड़ की संस्कृति और पारंपरिक स्वाद

निमाड़ की पारंपरिक रसोई में इस सब्जी को एक विशेष दर्जा प्राप्त है। भले ही बारिश के मौसम में बाजार तरह-तरह की मौसमी सब्जियों से भरे रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई परिवार अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए इस पारंपरिक व्यंजन को बनाना पसंद करते हैं। दही की खटास और मसालों का तीखापन जब सुलझने की फली के साथ मिलता है, तो यह इसे एक विशिष्ट पहचान देता है। बुरहानपुर के निवासियों के लिए यह मात्र एक सब्जी नहीं, बल्कि स्थानीय स्वाद और यादों का एक हिस्सा है। इसे गर्मागर्म रोटी या चावल के साथ परोसा जाए, तो बरसात के मौसम में भोजन का आनंद दोगुना हो जाता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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