बारिश के मौसम में खूब पसंद की जाती है छत्तीसगढ़ की यह जंगली सब्जी, जानें बनाने की आसान और पारंपरिक विधि जीवनशैली एक महीने पहले 85
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में बारिश के दौरान उगने वाला छाता पुटू (जंगली मशरूम) न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद पौष्टिक माना जाता है।

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में मानसून की शुरुआत के साथ ही प्रकृति के कई अनोखे स्वाद लोगों की थालियों की शोभा बढ़ाने लगते हैं। इस मौसम में खेतों, जंगलों और पेड़ों के आस-पास प्राकृतिक रूप से उगने वाला छाता पुटू यानी जंगली छाता मशरूम लोगों की पहली पसंद बन जाता है। यह मौसमी सब्जी न केवल खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है, बल्कि इसे सेहत के लिए भी बहुत पौष्टिक माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे बड़े चाव से पारंपरिक तरीके से भुजिया या फिर मसालेदार ग्रेवी वाली सब्जी के रूप में बनाकर खाते हैं।

जर्वे गांव की अन्नू ने साझा की अपनी पारंपरिक रेसिपी

जांजगीर-चांपा जिले के जर्वे गांव की रहने वाली गृहिणी अन्नू बताती हैं कि बारिश का मौसम शुरू होते ही जैसे ही जंगलों और खेतों में ताजा छाता मशरूम दिखाई देने लगते हैं, घरों में इसे बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है। इसे पकाना बेहद आसान है और इसका स्वाद बेहद शानदार होता है।

बनाने का आसान तरीका

इस स्वादिष्ट पारंपरिक डिश को घर पर तैयार करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:

  • सबसे पहले छाता मशरूम को पानी से अच्छी तरह धोकर पूरी मिट्टी साफ कर लें और फिर इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
  • एक कड़ाही में तेल गर्म करें और उसमें सरसों, कटी हुई प्याज और लहसुन डालकर सुनहरा होने तक भूनें।
  • इसके बाद कड़ाही में कटे हुए टमाटर, हरी मिर्च, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और अपनी पसंद के अन्य मसाले डालकर अच्छी तरह भूनें ताकि एक बढ़िया मसाला तैयार हो जाए।
  • मसाला पक जाने के बाद इसमें कटे हुए मशरूम डालें और इसे करीब 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें।

गरमा-गरम चावल के साथ लें आनंद

जब सब्जी पूरी तरह पक जाए, तो इसे आंच से उतार लें। गृहिणी अन्नू के अनुसार, गरम भात यानी उबले हुए चावल के साथ इस छाता पुटू की मसालेदार सब्जी का स्वाद दोगुना हो जाता है। यह मौसमी सब्जी न केवल जुबान को बेहतरीन स्वाद देती है, बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी प्रदान करती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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