राधाष्टमी 2026: सौभाग्य योग में आज राधारानी का जन्मोत्सव, जानें पूजा विधि और आरती धर्म एक घंटा पहले 3
आज भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि पर राधाष्टमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है, जिसमें पूजा के लिए केवल 2 घंटे 27 मिनट का विशेष शुभ मुहूर्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से राधारानी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

राधाष्टमी 2026 का विशेष महत्व

आज देशभर में राधाष्टमी का पावन पर्व अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। विशेष रूप से बरसाना और वृंदावन जैसे ब्रज क्षेत्रों में इसका उल्लास देखते ही बनता है। प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधारानी के प्राकट्य दिवस के रूप में यह उत्सव हर्षोल्लास के साथ आयोजित होता है। इस दिन श्रद्धालु राधारानी का व्रत रखते हैं और उनकी विशेष आराधना करते हैं। मान्यता है कि राधाष्टमी पर राधारानी की भक्ति करने से जीवन में प्रेम, आनंद और समर्पण का भाव बढ़ता है, साथ ही भक्त को कृष्ण कृपा भी सहज ही प्राप्त हो जाती है। इस वर्ष राधाष्टमी के अवसर पर सौभाग्य योग, आयुष्मान योग और रवि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो इस दिन की महत्ता को और अधिक बढ़ा देता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त और तिथि

पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि का प्रारंभ 18 सितंबर को दोपहर लगभग 1 बजे हो गया था, जिसका समापन 19 सितंबर यानी आज दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर आज राधाष्टमी का व्रत और पूजन संपन्न किया जा रहा है। आज से ही 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत का भी शुभारंभ हो गया है। आज पूजन के लिए भक्तों को केवल 2 घंटे 27 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है। मध्याह्न काल में पूजा का यह विशेष समय सुबह 11:01 बजे से लेकर दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा। भक्तों को इसी अवधि के भीतर राधारानी के प्राकट्य उत्सव की पूजा विधि संपन्न करनी चाहिए।

शुभ योगों का महासंयोग

इस वर्ष राधाष्टमी पर ग्रहों की स्थिति भी अत्यंत शुभ है। सौभाग्य योग, आयुष्मान योग और रवि योग के साथ ही कई राजयोगों का निर्माण हो रहा है। गुरु के अपनी उच्च राशि में विराजमान होने से हंसराज योग और शुक्र के तुला राशि में स्थित होने से मालव्य राजयोग का प्रभाव बना हुआ है। इसके अतिरिक्त कन्या राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग का भी निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन शुभ योगों के काल में की गई आराधना से ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव दूर होते हैं और साधक के सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है।

राधारानी की पूजा विधि

राधाष्टमी पर पूजन के लिए विशेष सावधानी और विधि का पालन करना श्रेयस्कर माना जाता है। पूजा के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के पश्चात अपने पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
  • एक चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं और उस पर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • राधाष्टमी की पूजा विशेष रूप से मध्याह्न के समय की जानी चाहिए।
  • सर्वप्रथम राधारानी को पंचामृत से स्नान कराएं। तत्पश्चात उन्हें नए वस्त्र, सुंदर आभूषण, पुष्प और माला अर्पित करें।
  • पूजा में चंदन, कुमकुम, अक्षत, धूप और दीपक का प्रयोग करें।
  • भोग में माखन-मिश्री, खीर, ऋतुफल या अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुरूप सात्विक खाद्य पदार्थों को अर्पित करें।
  • पूजा के अंत में राधा-कृष्ण के मंत्रों का जाप करें, राधाष्टमी की पौराणिक कथा का श्रवण करें और फिर आरती कर प्रसाद वितरित करें।

राधाष्टमी के प्रमुख मंत्र

राधाष्टमी के दिन राधारानी के मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है। भक्त अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार निम्नलिखित मंत्रों का चयन कर सकते हैं:

  • मूल महामंत्र: ॐ ह्रीं श्रीराधायै स्वाहा
  • बीज मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं राधिकायै नमः
  • सरल मंत्र: ॐ श्री राधिकायै नमः
  • राधा गायत्री मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै विद्महे गान्धर्विकायै विधीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्
  • अन्य प्रिय मंत्र: राधे कृष्ण, राधे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, राधे राधे। साथ ही ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नमो भगवते राधाप्रियाय मंत्र का भी जाप किया जा सकता है।

श्रीराधा रानी की आरती

पूजा के समापन पर श्रद्धापूर्वक राधारानी की आरती गाई जाती है:

आरती श्री वृषभानु लली की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की। आरती श्री वृषभानु लली की। त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि। पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम छवि सुन्दरता की॥ आरती श्री वृषभानुसुता की। मुनि मन मोहन मोहन मोहनि, मधुर मनोहर मूरति सोहनि। अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि, प्रिय अति सदा सखी ललिता की॥ आरती श्री वृषभानुसुता की। संतत सेव्य सत मुनि जनकी, आकर अमित दिव्यगुन गनकी। आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी, अति अमूल्य सम्पति समता की॥ आरती श्री वृषभानुसुता की। कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि, चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि। जगजननि जग दुखनिवारिणि, आदि अनादिशक्ति विभुता की॥ आरती श्री वृषभानुसुता की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की॥

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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