घर पर बनाएं लाजवाब अनरसा मिठाई, बाजार जैसी खुशबू और स्वाद का तरीका जानें जीवनशैली एक घंटा पहले 4
हरितालिका तीज के अवसर पर गया की प्रसिद्ध मिठाई अनरसा की मांग काफी बढ़ गई है। आप इसे घर पर भी बेहद आसानी से तैयार कर सकते हैं, जानिए इसकी पूरी विधि और जरूरी सामग्री।

तीज के पर्व पर अनरसा की विशेष मांग

हरितालिका तीज का त्यौहार सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस खास मौके पर जहां महिलाएं पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ करती हैं, वहीं पारंपरिक मिठाइयों की खरीदारी और सेवन का भी अलग ही महत्व है। इन दिनों बाजार में मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जिसमें अनरसा मिठाई की सबसे ज्यादा मांग है। अनरसा मूल रूप से बिहार के गया की एक प्रतिष्ठित मिठाई है, जिसका नाम लेते ही मिठास का अहसास होने लगता है। न केवल बिहार में, बल्कि झारखंड के पलामू जैसे क्षेत्रों में भी यह मिठाई लोगों की पहली पसंद बनी हुई है।

पलामू में गया वाले स्वाद का जादू

पलामू जिला मुख्यालय स्थित मेदिनीनगर के बाजारों में इन दिनों अनरसा की जबरदस्त धूम है। लोग बाजार से इसे खरीदने के साथ-साथ घर पर भी पारंपरिक तरीके से इसे बनाने में रुचि ले रहे हैं। मेदिनीनगर में स्थित शिवा अनरसा भंडार पर ग्राहकों का तांता लगा हुआ है। इस दुकान के संचालक पिंटू कुमार बताते हैं कि उनके परिवार का गया से गहरा नाता है। उनके पूर्वज गया में ही मिठाई बनाने का पारिवारिक काम करते थे। करीब 20 वर्षों पहले जब वे पलामू आए, तो उन्होंने यहां के लोगों को गया वाला असली स्वाद देने का फैसला किया। उस समय पलामू में अनरसा के लिए कोई विशेष दुकान नहीं थी, लेकिन आज शिवा अनरसा भंडार अपनी पहचान बना चुका है और आसपास के क्षेत्रों में भी इनके बनाए अनरसे की काफी मांग है।

अनरसा बनाने की विस्तृत विधि और सामग्री

अगर आप भी बाजार जैसे अनरसे का स्वाद घर पर लेना चाहते हैं, तो इसे बनाना कोई कठिन काम नहीं है। अनरसा मुख्य रूप से चावल, चीनी, खोआ और तिल के मेल से तैयार किया जाता है। पिंटू कुमार ने इसे बनाने का आसान तरीका साझा किया है:

  • सबसे पहले चावल को बारीक पीसकर उसमें चीनी मिलाई जाती है।
  • इस तैयार मिश्रण को लगभग दो से तीन घंटे के लिए एक तरफ रख दिया जाता है ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए।
  • समय पूरा होने के बाद मिश्रण को गूंथ लिया जाता है और इसकी छोटी-छोटी लोइयां बनाई जाती हैं।
  • प्रत्येक लोई के भीतर शुद्ध खोआ भरा जाता है और फिर इसे गोल आकार दिया जाता है।
  • अंतिम चरण में इसे गर्म तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है।
  • मिठाई के ऊपर तिल की परत लगाई जाती है, जो इसे बेहतरीन खुशबू और कुरकुरापन प्रदान करती है।

पिंटू कुमार के अनुसार, मिठाई की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वे हमेशा शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाले खोआ का ही उपयोग करते हैं, जो स्वाद के लिए सबसे जरूरी है।

कीमत और दुकान का समय

शिवा अनरसा भंडार पर इन दिनों तीज के त्योहार के कारण काफी रौनक है। यहां ग्राहक अनरसा को 15 रुपये प्रति पीस की दर से खरीद सकते हैं, जबकि एक किलो अनरसा की कीमत 200 रुपये निर्धारित की गई है। ग्राहकों की सुविधा के लिए यह दुकान सुबह 9 बजे से लेकर रात 9 बजे तक खुलती है। त्योहारों के मौसम में बिक्री में हुई इस बढ़ोतरी से दुकानदार भी काफी उत्साहित हैं। यदि आप पलामू में हैं और गया के पारंपरिक अनरसे का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो शिवा अनरसा भंडार का स्वाद जरूर चखें। घर पर बनाई गई यह मिठाई न केवल शुद्ध होती है, बल्कि परिवार के साथ तीज के उत्सव को और भी खास बना देती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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