बरसात के मौसम में छत्तीसगढ़ी स्वाद का लुत्फ: मूली भाजी और दाल की पारंपरिक रेसिपी जीवनशैली एक घंटा पहले 3
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक मूली भाजी और दाल की सब्जी बरसात के मौसम में घरों में खूब पसंद की जाती है। कम मसालों और देसी तड़के वाली यह रेसिपी न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि सेहत से भी भरपूर है।

छत्तीसगढ़ी खान-पान की पहचान: मूली भाजी और दाल

छत्तीसगढ़ का खान-पान अपनी सादगी और पौष्टिकता के लिए पूरे देश में मशहूर है। यहां के पारंपरिक व्यंजनों में से एक है मूली भाजी और दाल की लाजवाब सब्जी, जिसे मानसून के दौरान राज्य के अधिकांश घरों में बड़े चाव से बनाया जाता है। बरसात के इस मौसम में जब खेतों और बाजारों में ताजी हरी सब्जियां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहती हैं, तब इस व्यंजन की मांग और बढ़ जाती है। इसका स्वाद इतना निराला होता है कि लोग इसे चावल और रोटी, दोनों के साथ खाना पसंद करते हैं। इसे बनाना न केवल सरल है, बल्कि यह कम मेहनत में तैयार होने वाला एक बेहतरीन स्वास्थ्यवर्धक विकल्प भी है।

भाजी को साफ करने की विधि

इस पारंपरिक डिश को बनाने की शुरुआत मूली भाजी की सफाई से होती है। सबसे पहले ताजी भाजी को अच्छे से छांट लिया जाता है ताकि उसमें कोई अनुपयोगी हिस्सा न रहे। इसके बाद इसे बहते हुए साफ पानी से धोना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे भाजी की पत्तियों पर लगी मिट्टी या बारीक धूल के कण निकल जाएं। सफाई के बाद भाजी को बारीक काटा जाता है और एक बार फिर पानी से धोया जाता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि सब्जी पूरी तरह शुद्ध और गंदगी मुक्त रहे।

दाल के साथ पकाने की प्रक्रिया

सब्जी को तैयार करने के लिए सबसे पहले एक कुकर का उपयोग किया जाता है। धुली और कटी हुई मूली भाजी को दाल के साथ मिलाया जाता है और इसमें आवश्यकतानुसार थोड़ा पानी और नमक शामिल किया जाता है। कुकर का ढक्कन बंद करने के बाद इसे मध्यम आंच पर 2 से 3 सीटी आने तक पकाया जाता है। एक बार जब दाल और भाजी अच्छी तरह गल जाएं, तो कुकर को तब तक के लिए छोड़ दिया जाता है जब तक कि उसका दबाव पूरी तरह समाप्त न हो जाए। यह भाप में पकने की विधि सब्जी के प्राकृतिक स्वाद को बरकरार रखती है।

देसी तड़का: स्वाद का असली रहस्य

सब्जी का जायका कई गुना बढ़ाने के लिए इसमें अंत में देसी तड़का लगाया जाता है। इसके लिए एक अलग कढ़ाई में तेल गर्म किया जाता है। जैसे ही तेल पर्याप्त गर्म हो जाए, उसमें मिर्च, बारीक कटा हुआ लहसुन और जीरा डाला जाता है। इन मसालों के चटकते ही कुकर में पकी हुई भाजी और दाल के मिश्रण को कढ़ाई में डाल दिया जाता है। इस मिश्रण को कुछ देर तक धीमी आंच पर अच्छी तरह मिलाया जाता है ताकि तड़के का पूरा स्वाद दाल और भाजी के रेशे-रेशे में समा जाए। यह प्रक्रिया इस साधारण व्यंजन को एक बेहतरीन सुगंध और स्वाद प्रदान करती है।

छत्तीसगढ़ी थाली का खास हिस्सा

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और पारंपरिक परिवारों में इस तरह की हरी सब्जियों का विशेष महत्व है। विशेष रूप से बरसात के दिनों में, यह सब्जी छत्तीसगढ़ी थाली की शोभा बढ़ाती है। कम मसालों के उपयोग के बावजूद, यह डिश अपनी पौष्टिकता के लिए जानी जाती है। यही कारण है कि यह व्यंजन आज भी छत्तीसगढ़ की रसोई में अपनी जगह बनाए हुए है और लोग इसे बड़े उत्साह के साथ अपने दैनिक आहार में शामिल करते हैं। यह न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसे बरसात के मौसम के लिए एक आदर्श भोजन माना जाता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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