जीवनशैली
2 घंटे पहले
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विचारों
दिल्ली की नौकरी से लेकर पटना के स्टॉल तक का सफर
जीवन में बदलाव का साहस रखने वाले लोग अक्सर नई मिसाल कायम करते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है मोहन मंडल ने, जिन्होंने दिल्ली की एक निजी कंपनी में अपनी नौकरी को अलविदा कहा और पटना में आकर बिरयानी का छोटा सा व्यापार शुरू किया। आज वे पटना की सड़कों पर अपने वेज बिरयानी स्टॉल के लिए खासे लोकप्रिय हैं। उनका स्टॉल एग्जिबिशन रोड पर स्थित सीडीए बिल्डिंग के गेट के पास मौजूद है। सुबह के साढ़े 6 बजे से लेकर शाम के 5 बजे तक मोहन मंडल यहाँ ग्राहकों को अपनी हाथ की बनी लजीज बिरयानी परोसते नजर आते हैं।
बिरयानी के स्वाद और लॉकडाउन की कहानी
मोहन मंडल का यह सफर कोरोना काल के दौरान शुरू हुआ। दिल्ली में नौकरी के दिनों में वे अक्सर दोपहर के भोजन में वेज बिरयानी खाया करते थे। बिरयानी बेचने वाले दुकानदार के साथ उनकी अच्छी मित्रता हो गई और इसी दौरान उन्होंने बिरयानी बनाने की विशेष रेसिपी सीखी। जब कोरोना महामारी और उसके बाद लगे लॉकडाउन के कारण जीवन की रफ्तार थमी, तो मोहन मंडल दिल्ली छोड़कर अपने घर बिहार लौट आए। वापस दिल्ली जाने की बजाय उन्होंने पटना की जमीन पर ही अपना खुद का काम करने का दृढ़ निश्चय किया। उन्होंने बिरयानी के बिजनेस को इसलिए चुना क्योंकि उस समय पटना में वेज बिरयानी के विकल्प काफी कम थे।
आम लोगों की पसंद और किफायती दाम
मोहन मंडल ने अपने स्टॉल पर बिरयानी की कीमत मात्र 20 रुपये रखी, ताकि समाज के हर तबके के लोग इसका स्वाद ले सकें। सीडीए बिल्डिंग के पास का इलाका काफी व्यस्त रहता है, जहाँ मजदूर वर्ग, राहगीर, ऑटो और टैक्सी ड्राइवर तथा आसपास के कार्यालयों में काम करने वाले लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं। इन लोगों के लिए मोहन मंडल का स्टॉल दोपहर के भोजन का एक बेहतरीन और सस्ता ठिकाना बन गया है। उनके व्यापार की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सामान्य दिनों में वह करीब 5 किलो चावल की बिरयानी बेच देते हैं, जबकि भीड़भाड़ वाले दिनों में यह खपत 10 किलो तक पहुँच जाती है।
मेहनत और लगन की मिसाल
मोहन मंडल का दिन सुबह 4 बजे से ही शुरू हो जाता है, जब वे अपनी बिरयानी को स्वादिष्ट मसालों के साथ तैयार करना शुरू करते हैं। साढ़े 6 बजे तक वे अपना स्टॉल सजा लेते हैं और पूरे दिन ग्राहकों को सेवा देते हैं। मौसम चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, तेज धूप, मूसलाधार बारिश, लू या फिर कड़ाके की ठंड, मोहन मंडल हर परिस्थिति में अपने स्टॉल पर डटे रहते हैं। उनकी इस अथक मेहनत से ही आज उनके परिवार का गुजारा चल रहा है। पिछले चार-पांच वर्षों से वे निरंतर इसी जगह पर लोगों को सेवा प्रदान कर रहे हैं।
क्या खास है इस बिरयानी में?
मोहन मंडल की बिरयानी न केवल सस्ती है, बल्कि इसके जायके में भी कोई कमी नहीं है। वे इसे सोयाबीन, मटर और पनीर के साथ विशेष मसालों के मिश्रण से तैयार करते हैं। परोसते समय वे एक प्लेट बिरयानी के साथ दो प्रकार की चटनी, रायता, ताजा सलाद और हरी मिर्च भी देते हैं, जो बिरयानी के स्वाद को और भी बढ़ा देता है। उनकी बिरयानी की शुरुआती कीमत 20 रुपये है, लेकिन ग्राहकों की भूख और आवश्यकता के अनुसार वे 30 रुपये, 50 रुपये और 60 रुपये की प्लेट भी उपलब्ध कराते हैं। उनकी इस सादगी और स्वाद ने ही उन्हें पटना के लोगों के बीच पहचान दिलाई है।
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