झारखंड का मशहूर मुर्गा पीठा: साल के पत्तों में लिपटी अनोखी रेसिपी और बेमिसाल स्वाद जीवनशैली एक घंटा पहले 4
झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों में मुर्गा पीठा अपनी खास पहचान रखता है। यह डिश स्वाद और सेहत का एक अनूठा संगम है जिसे बनाने का तरीका भी बेहद अलग है।

मुर्गा पीठा बनाने की पारंपरिक विधि

झारखंड के खानपान की दुनिया में मुर्गा पीठा एक ऐसा नाम है जो अपने अनोखे स्वाद और बनाने के खास तरीके के लिए मशहूर है। यह पकवान न केवल खाने में स्वादिष्ट है, बल्कि यह पोषण से भी भरपूर होता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पकाने के लिए साल के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसमें एक अलग ही सोंधी खुशबू जोड़ देते हैं।

सामग्री और तैयारी की प्रक्रिया

इस डिश को तैयार करने के लिए सबसे पहले अरवा चावल को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर कुछ घंटों के लिए पानी में भिगोकर रखा जाता है। जब चावल नरम हो जाएं, तो उन्हें पीसकर एक मुलायम घोल या आटे के रूप में तैयार किया जाता है। दूसरी तरफ चिकन को छोटे टुकड़ों में काटकर उसमें नमक, हल्दी, अदरक, लहसुन और पारंपरिक देसी मसालों का मिश्रण डाला जाता है। इन सभी सामग्रियों को चिकन में अच्छी तरह मिलाकर कुछ समय के लिए मैरिनेट होने के लिए छोड़ दिया जाता है।

भाप में पकाने का जादुई तरीका

जब चिकन और चावल का घोल दोनों तैयार हो जाते हैं, तब चावल के मिश्रण में मसालेदार चिकन के टुकड़ों को भरकर स्टफिंग तैयार की जाती है। इसके बाद इसे साल के पत्तों में सावधानीपूर्वक लपेट दिया जाता है। अंत में इन पैकेटों को 30 से 40 मिनट तक भाप यानी स्टीम में पकाया जाता है। भाप में धीमी आंच पर पकने के कारण चिकन का रस और मसालों का स्वाद चावल के आटे में गहराई तक समा जाता है। साल के पत्तों की महक इस पूरे व्यंजन के स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है, जिससे यह लोगों का पसंदीदा भोजन बन जाता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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