जलेबी और इमरती: दोनों मिठाइयों में क्या है बड़ा अंतर? सामग्री और बनावट से समझें इनकी खासियत जीवनशैली एक घंटा पहले 3
मिठाई की दुकानों पर सजी जलेबी और इमरती भले ही पहली नज़र में एक जैसी लगें, लेकिन इनके स्वाद, बनाने के तरीके और इस्तेमाल होने वाली सामग्री में जमीन-आसमान का फर्क होता है।

दिखने में एक जैसी पर असल में अलग

मिठाई की दुकानों पर अक्सर जलेबी और इमरती एक साथ रखी जाती हैं। इन दोनों का आकार गोल होता है और दोनों ही चाशनी में डूबी हुई होती हैं, जिसके कारण कई बार लोग, विशेषकर बच्चे, इनमें अंतर नहीं कर पाते। हालांकि, अगर आप इनके स्वाद, बनावट और इन्हें बनाने की प्रक्रिया को बारीकी से देखें, तो पता चलता है कि ये दो पूरी तरह से अलग मिठाइयां हैं। त्योहारों या खास अवसरों पर जब ये साथ मिलती हैं, तो लोग इन्हें अक्सर एक ही मान लेते हैं, लेकिन इनके बीच कई बड़े और महत्वपूर्ण अंतर छिपे हैं।

आकार और बाहरी बनावट

जलेबी और इमरती के बीच का सबसे स्पष्ट अंतर उनके आकार में होता है। जलेबी को पतले लच्छों के रूप में बनाया जाता है, जिन्हें एक खास सर्पिल आकार में घुमाकर तेल में तला जाता है। तलने के बाद जलेबी का बाहरी हिस्सा काफी कुरकुरा हो जाता है और अंदर का भाग रस से भरा होता है। दूसरी ओर, इमरती का आकार एक फूल जैसा होता है। इसके बीच में एक बड़ा घेरा होता है और उसके चारों ओर ८-१० छोटी गोलाकार डिजाइन बनाई जाती हैं। इमरती जलेबी की तुलना में काफी मोटी और फूली हुई दिखाई देती है। जलेबी अंदर से नरम होती है, जबकि इमरती की बनावट अंदर और बाहर दोनों तरफ से थोड़ी अधिक सख्त और सघन होती है।

घोल और सामग्री का फर्क

जलेबी और इमरती के बीच मुख्य अंतर उनकी आधार सामग्री में है। जलेबी को बनाने के लिए मैदे का इस्तेमाल किया जाता है। मैदे में दही या खमीर मिलाकर ६-८ घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है ताकि वह अच्छे से खमीर उठकर तैयार हो जाए। इसके विपरीत, इमरती पूरी तरह से उड़द की दाल से बनती है। सबसे पहले उड़द की दाल को अच्छी तरह भिगोकर महीन पीसा जाता है ताकि एक गाढ़ा और चिकना घोल तैयार हो सके। इमरती के घोल में बेकिंग सोडा का इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि इसे हाथ से बहुत देर तक फेंटा जाता है ताकि इसमें हवा भर जाए और यह अपने आप फूल सके।

स्वाद और खाने का अनुभव

स्वाद के मामले में जलेबी का स्वाद मैदा और खमीर की वजह से हल्का सा खट्टा और मीठा होता है, जो इसे एक खास कुरकुरापन देता है। वहीं, इमरती का स्वाद अधिक मीठा होता है और उड़द की दाल के उपयोग के कारण इसका जायका जलेबी से पूरी तरह भिन्न लगता है। जलेबी को अक्सर सुबह के नाश्ते के रूप में गर्म-गर्म खाना पसंद किया जाता है, जिसे कई लोग दही के साथ भी खाते हैं। जबकि इमरती शाम के समय भी बाजार में उपलब्ध रहती है और इसे गर्म न होने पर भी लोग उतने ही चाव से खाना पसंद करते हैं।

चाशनी और उपयोग की विविधता

दोनों ही मिठाइयों को तैयार करने के बाद गर्म चाशनी में डुबोया जाता है। हालांकि, इमरती चाशनी को लंबे समय तक सोख कर रखती है, जिससे वह अधिक रसीली लगती है। उपयोग के दृष्टिकोण से, जलेबी जहां रोजाना के नाश्ते का हिस्सा अधिक है, वहीं इमरती का महत्व पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजनों और त्योहारों पर एक विशेष मिठाई के रूप में अधिक होता है। संक्षेप में कहें तो, जलेबी मैदा से बनी एक पतली और कुरकुरी मिठाई है, जबकि इमरती उड़द की दाल से तैयार एक मोटी और अपेक्षाकृत नरम मिठाई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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