पटना की 66 साल पुरानी इस दुकान पर मिलते हैं मुंह में घुल जाने वाले गुलाब जामुन, लस्सी के दीवाने हैं लोग जीवनशैली एक घंटा पहले 2
पटना जंक्शन के पास स्थित बाबा शाही लस्सी वाला दुकान अपनी पुरानी परंपरा और लाजवाब स्वाद के लिए मशहूर है। करीब 66 साल पुरानी इस दुकान पर लस्सी और मिठाइयों का स्वाद लेने के लिए ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ती है।

पटना की विरासत और मिठास का केंद्र

बिहार की राजधानी पटना में कई ऐसी पुरानी दुकानें हैं जो अपने स्वाद और गुणवत्ता के कारण दशकों से लोगों के दिलों पर राज कर रही हैं। इन्ही में से एक खास नाम है पटना जंक्शन के समीप न्यू मार्केट में स्थित बाबा शाही लस्सी वाला। लगभग 66 साल से संचालित यह दुकान पटना के खान-पान की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। यहां के लस्सी और मिठाइयों का जायका लेने के लिए शहर ही नहीं बल्कि दूर-दराज से भी लोग पहुंचते हैं।

नमकीन से शुरू हुआ था सफर

इस दुकान की शुरुआत की कहानी काफी दिलचस्प है। दुकान के वर्तमान संचालक नईम जी बताते हैं कि इस व्यवसाय की नींव 1960 के आसपास रखी गई थी। शुरुआत में यहां केवल नमकीन खस्ता यानी निमकी बेची जाती थी। दुकान की लोकेशन महावीर मंदिर के बेहद करीब होने के कारण, दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और आम राहगीरों के बीच यह स्थान बहुत जल्दी लोकप्रिय हो गया। शुरुआत में यह एक छोटा सा काउंटर था, जहां ग्राहकों को ताजा और स्वादिष्ट नमकीन मिलता था। जैसे-जैसे ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया, वैसे-वैसे इस दुकान की मेन्यू में नए-नए व्यंजन और मिठाइयां शामिल होती गईं। आज यह दुकान पटना की एक जानी-मानी पहचान बन चुकी है।

विविधता और स्वाद का मेल

आज इस दुकान पर एक दर्जन से भी अधिक प्रकार के खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं। यहाँ मिलने वाली लस्सी इतनी गाढ़ी और स्वादिष्ट होती है कि लोग इसे पीने के बजाय खाना पसंद करते हैं। इसके अलावा यहां का गुलाब जामुन और रसगुल्ला इतना नरम होता है कि वह मुंह में जाते ही घुल जाता है। दुकान में मिलने वाले अन्य प्रमुख व्यंजनों में दही भल्ला, लिट्टी, समोसा, चंद्रकला और लौंगलता शामिल हैं, जो ग्राहकों को अपनी ओर खींचते हैं।

परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी का योगदान

समय के साथ कारोबार का विस्तार हुआ और आज यह दुकान परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी द्वारा संभाली जा रही है। नई पीढ़ी के लोग पुरानी परंपराओं और स्वाद की शुद्धता को बरकरार रखते हुए ग्राहकों की पसंद का पूरा ख्याल रख रहे हैं। यही वजह है कि जो ग्राहक दशकों पहले यहां आया करते थे, वे आज भी अपनी पुरानी यादों के साथ यहां पहुंचते हैं। साथ ही, युवाओं की नई पीढ़ी भी यहां के स्वाद की दीवानी हो चुकी है।

किफायती दाम और विस्तार

नईम जी ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि एक दौर ऐसा भी था जब लस्सी मात्र 35 पैसे में मिला करती थी, हालांकि आज इसकी कीमत 35 रुपये है। अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों की बात करें तो पनीर समोसा और खस्ता कचौड़ी 14 रुपये प्रति पीस, दही बड़ा 10 रुपये प्रति पीस, लौंगलता 15 रुपये प्रति पीस, गुलाब जामुन और रसगुल्ला 15 रुपये प्रति पीस तथा रसमलाई 30 रुपये प्रति पीस की दर से उपलब्ध है। ग्राहकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पहले जो दुकान एक काउंटर पर चलती थी, आज वहां चार काउंटर कार्यरत हैं।

भीड़ का प्रबंधन और टोकन सिस्टम

खासकर मंगलवार और शनिवार के दिनों में दुकान पर ग्राहकों की अत्यधिक भीड़ देखने को मिलती है। भारी संख्या में आने वाले लोगों को व्यवस्थित करने और उन्हें बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए दुकानदार ने टोकन सिस्टम लागू किया है। ग्राहक पहले काउंटर से टोकन प्राप्त करते हैं और फिर अपनी बारी का इंतजार कर ऑर्डर लेते हैं। पटना जंक्शन के पास होने की वजह से, यहां न केवल स्थानीय निवासी बल्कि दूसरे जिलों और राज्यों से आए यात्री भी बड़ी संख्या में रुककर इस स्वाद का आनंद लेते हैं। कई नियमित ग्राहक अपने साथ दोस्तों और परिवार को भी यहां का मशहूर स्वाद चखाने लाते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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