मुजफ्फरपुर के खास मिनी समोसे का है जलवा, 13 साल से बरकरार है स्वाद का जादू जीवनशैली एक महीने पहले 65
मुजफ्फरपुर के कलमबाग चौक पर मिलने वाले मिनी समोसे अपनी खास तीसी की चटनी और भुनी मिर्च के लिए मशहूर हैं, जहां लोग बरसों से खिंचे चले आते हैं।

मुजफ्फरपुर का मशहूर मिनी समोसा

मुजफ्फरपुर का कलमबाग चौक आज एक बेहद खास वजह से चर्चा में है। यहाँ स्थित एक छोटी सी दुकान पर मिलने वाले मिनी समोसे का स्वाद लोगों के बीच काफी मशहूर है। आज के दौर में जब महंगाई के कारण हर चीज़ महंगी होती जा रही है, यह दुकान न केवल अपने अनोखे स्वाद के लिए, बल्कि अपनी किफायती कीमतों के लिए भी ग्राहकों के दिलों में जगह बनाए हुए है। दुकान संचालक गोलू कुमार पिछले 13 सालों से इस व्यवसाय को पूरी ईमानदारी के साथ चला रहे हैं।

समय के साथ बदला दाम लेकिन स्वाद वही

गोलू कुमार बताते हैं कि जब उन्होंने 13 साल पहले यह काम शुरू किया था, तब एक समोसे की कीमत मात्र ढाई रुपये हुआ करती थी। हालांकि समय के साथ महंगाई बढ़ी और कच्चे माल की लागत में भी इजाफा हुआ, जिसके कारण कीमतों में बदलाव करना पड़ा। अब ग्राहकों को 15 रुपये की एक प्लेट में तीन मिनी समोसे परोसे जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि दाम बढ़ने के बावजूद ग्राहकों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है।

खास चटनी और बिना प्याज-लहसुन का स्वाद

इस दुकान के समोसे की सबसे बड़ी विशेषता इसके साथ परोसी जाने वाली तीसी की चटनी है। गोलू कुमार के अनुसार, वे इस चटनी को आलू और तीसी के साथ स्थानीय मसालों का सही मिश्रण देकर तैयार करते हैं। चटनी के साथ दी जाने वाली भुनी हुई हरी मिर्च समोसे के अनुभव को और भी लाजवाब बना देती है। इसके अलावा, एक और बड़ी खूबी यह है कि समोसे बनाने में प्याज और लहसुन का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया जाता है, जिसके कारण यह हर उम्र और वर्ग के लोगों की पहली पसंद बन गया है।

हर दिन होती है बड़ी बिक्री

दुकान का समय सुबह से ही शुरू हो जाता है, जब यहाँ लिट्टी-चना की बिक्री होती है। इसके बाद दोपहर करीब 2 बजे के बाद से मिनी समोसे तैयार किए जाते हैं। शाम होते-होते दुकान पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। गोलू कुमार को लगातार समोसे तलने पड़ते हैं ताकि मांग पूरी की जा सके। आंकड़ों के अनुसार, यहाँ हर दिन 500 से 1000 प्लेट समोसे बिक जाते हैं।

स्थानीय लोगों और पर्यटकों की पहली पसंद

यहाँ केवल आसपास के दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी या स्थानीय निवासी ही नहीं आते, बल्कि मुजफ्फरपुर आने वाले बाहरी लोग भी इस स्वाद का आनंद लेने जरूर पहुंचते हैं। कई लोग तो यहाँ का स्वाद चखने के बाद अपने परिवार और मित्रों के लिए समोसे पैक करवाकर ले जाना नहीं भूलते। गोलू कुमार का कहना है कि उनकी प्राथमिकता हमेशा ग्राहकों को शुद्ध और ताज़ा खाना परोसने की होती है, और यही वजह है कि उनकी छोटी सी दुकान आज मुजफ्फरपुर के खाने-पीने के शौकीनों के लिए एक बड़ा केंद्र बन चुकी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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