जिमी कांदा सुखड़ी: छत्तीसगढ़ का वह पारंपरिक व्यंजन जिसमें मिलता है वेज में नॉनवेज जैसा लाजवाब स्वाद जीवनशैली 4 घंटे पहले 6
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई में जिमी कांदा को सुखाकर सालभर के लिए सुरक्षित रखने की एक अनोखी कला है, जिससे बरसात के दिनों में नॉनवेज जैसी स्वादिष्ट सब्जी तैयार की जाती है।

छत्तीसगढ़ का पारंपरिक स्वाद: क्या है जिमी कांदा सुखड़ी?

छत्तीसगढ़ की समृद्ध और पारंपरिक रसोई में कई ऐसे व्यंजन बनाए जाते हैं, जो न केवल स्वाद में लाजवाब होते हैं बल्कि उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने की अनूठी कला को भी दर्शाते हैं। इन्हीं विशिष्ट व्यंजनों में से एक बेहद लोकप्रिय नाम है जिमी कांदा सुखड़ी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में इसे बनाने और सालभर सहेजकर रखने की परंपरा सदियों पुरानी है। जिमी कांदा की सुखड़ी एक ऐसी पारंपरिक देसी रेसिपी है, जिसे खास तौर पर उस समय के लिए तैयार किया जाता है जब बाजार में ताजी सब्जियां आसानी से उपलब्ध नहीं होती हैं। यह केवल एक साधारण भोजन नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ी खान-पान की संस्कृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा है।

सुखड़ी बनाने की पूरी विधि और प्रक्रिया

जिमी कांदा सुखड़ी तैयार करने की प्रक्रिया बेहद सरल और घरेलू स्तर पर बहुत प्रभावी है। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं इस पारंपरिक तरीके को आज भी बहुत सावधानी से अपनाती हैं। इसे सुखाने की तैयारी मुख्य रूप से निम्नलिखित चरणों में की जाती है:

  • सबसे पहले ताजे जिमी कांदा को लाकर उसे अच्छी तरह से साफ किया जाता है ताकि उसकी मिट्टी पूरी तरह निकल जाए।
  • इसके बाद, साफ किए गए जिमी कांदा को छोटे-छोटे और मनचाहे आकार के टुकड़ों में सावधानीपूर्वक काटा जाता है।
  • इन कटे हुए टुकड़ों को तेज धूप में कई दिनों तक अच्छी तरह सुखाया जाता है ताकि उसमें नमी का कोई अंश न रहे।
  • धूप में सुखाने से जिमी कांदा के टुकड़ों के भीतर मौजूद पानी की सारी मात्रा पूरी तरह से खत्म हो जाती है, जिससे इसके खराब होने की संभावना बिल्कुल समाप्त हो जाती है।
  • जब यह टुकड़े पूरी तरह कड़े और शुष्क हो जाते हैं, तब इन्हें एक साफ और सूखे डिब्बे में भरकर सुरक्षित रख लिया जाता है।

बरसात के मौसम में वरदान साबित होती है यह सुखड़ी

बरसात के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर तेज बारिश और अन्य कारणों से ताजी सब्जियां और विशेष रूप से जिमी कांदा मिलना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे कठिन समय में घरों में पहले से सहेजकर रखी गई जिमी कांदा सुखड़ी गृहणियों के लिए एक बड़ा सहारा बनती है। जब भी घर में कोई सब्जी उपलब्ध न हो, तब इस डिब्बे से जरूरत के अनुसार सुखड़ी निकाली जाती है और उसकी बेहद स्वादिष्ट सब्जी तैयार की जाती है। इस प्रकार, मौसमी कमी के दौरान भी परिवार को एक बहुत ही पौष्टिक और पारंपरिक स्वाद आसानी से मिल जाता है।

बनाने का पारंपरिक तरीका और इस्तेमाल होने वाले मसाले

जिमी कांदा सुखड़ी की सब्जी बनाने का तरीका सामान्य सब्जियों से काफी अलग और खास है। इसे रसोई में पकाने के लिए निम्नलिखित विधि का उपयोग किया जाता है:

  • सबसे पहले सूखी हुई सुखड़ी को आवश्यकतानुसार गुनगुने या सामान्य पानी में भिगोकर रखा जाता है ताकि वह फिर से थोड़ी नरम हो सके।
  • इसके बाद, सब्जी की ग्रेवी तैयार करने के लिए बारीक कटा हुआ प्याज, टमाटर, अदरक-लहसुन का पेस्ट और पारंपरिक घरेलू मसालों का उपयोग किया जाता है।
  • कढ़ाई में तेल गर्म करके प्याज और अदरक-लहसुन के पेस्ट को सुनहरे होने तक अच्छी तरह भूना जाता है।
  • इसके बाद टमाटर और देसी मसालों को डालकर तब तक पकाया जाता है जब तक कि मसाला पूरी तरह से तेल न छोड़ दे।
  • मसाला अच्छी तरह पकने के बाद पानी में भीगी हुई सुखड़ी को इसमें मिलाया जाता है और बेहद धीमी आंच पर धीरे-धीरे पकने के लिए छोड़ दिया जाता है।

वेज भोजन में नॉनवेज जैसा बेहतरीन स्वाद

जिमी कांदा सुखड़ी की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनोखा स्वाद और इसकी खास बनावट है। जब इसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है, तो इसकी सुगंध और स्वाद बेहद लाजवाब हो जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी तरह से शाकाहारी सब्जी को खाने के बाद लोगों को बिल्कुल मांसाहारी व्यंजन यानी नॉनवेज जैसा बेहतरीन स्वाद महसूस होता है। यही कारण है कि शाकाहारी भोजन पसंद करने वाले लोग भी इसे बड़े चाव से खाते हैं। इस गरमा-गरम सब्जी को जब चावल, दाल या रोटी के साथ परोसा जाता है, तो इसका जायका कई गुना बढ़ जाता है।

ग्रामीण संस्कृति और खाद्य संरक्षण की समृद्ध परंपरा

यह व्यंजन केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की प्राचीन खाद्य संरक्षण तकनीक को भी जीवित रखता है। ग्रामीण इलाकों में पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा के जरिए लोग खाद्य पदार्थों को व्यर्थ होने से बचाते हैं और उन्हें सालभर उपयोग में लाते हैं। मौसम में बदलाव होने के बाद भी जिमी कांदा सुखड़ी के जरिए लोग वही पुराना देसी और पारंपरिक स्वाद प्राप्त करते हैं, जो उनके जीवन और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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