दरभंगा टावर की मशहूर लस्सी: मात्र 50 रुपये में मलाई, मेवा और केसर का लाजवाब स्वाद जीवनशैली एक घंटा पहले 2
दरभंगा टावर की पहचान बन चुकी यह लस्सी अपने अनोखे स्वाद और कुल्हड़ वाली खुशबू के लिए जानी जाती है, जहाँ टोकन लेकर लोग अपनी बारी का इंतज़ार करते हैं।

दरभंगा की पहचान बनी टावर वाली लस्सी

दरभंगा टावर का चौराहा शहर की धड़कन माना जाता है। यहाँ की भीड़भाड़, बाजार की चहल-पहल और लोगों का जमावड़ा इसे एक खास पहचान देता है। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी चीज है जो स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों को चुंबक की तरह अपनी ओर खींचती है, और वह है दरभंगा टावर की मशहूर लस्सी। कई लोगों का मानना है कि यदि आपने दरभंगा की यात्रा की और टावर की इस लस्सी का स्वाद नहीं चखा, तो आपकी यात्रा अधूरी मानी जाती है। दशकों से यह छोटी सी दुकान न केवल अपनी सेवा दे रही है, बल्कि शहर के खान-पान की संस्कृति का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।

टोकन लेकर मिलता है स्वाद का मौका

इस दुकान की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ शाम ढलते ही लस्सी प्रेमियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। भीड़ को व्यवस्थित रखने और ग्राहकों की सुविधा के लिए यहाँ टोकन सिस्टम लागू है। ग्राहकों को अपनी लस्सी के लिए पहले टोकन लेना पड़ता है और फिर अपनी बारी आने का धैर्यपूर्वक इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, यह इंतजार किसी को अखरता नहीं है क्योंकि अंत में मिलने वाला स्वाद इस पूरे संघर्ष को सफल बना देता है।

मात्र 50 रुपये में मिलता है शाही स्वाद

महज 50 रुपये की कीमत में मिलने वाली यह लस्सी गर्मी के मौसम में किसी वरदान से कम नहीं है। यह केवल एक पेय नहीं है, बल्कि एक पूरा अनुभव है। गाढ़ी और ताजी दही को मथकर तैयार की गई लस्सी में ऊपर से मलाई और क्रीम की एक मोटी परत डाली जाती है। इसके स्वाद को और अधिक शाही बनाने के लिए इसमें काजू, पिस्ता और बादाम जैसे मेवे मिलाए जाते हैं। ऊपर से केसर का तड़का इसे एक अलग ही सुगंध और रंग प्रदान करता है। मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी जाने वाली यह लस्सी जब ठंडी-ठंडी परोसी जाती है, तो इसका देसी स्वाद और सौंधी खुशबू लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

शाम की रौनक और ग्राहकों का तांता

दुकान भले ही आकार में छोटी हो, लेकिन इसके स्वाद की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। जैसे ही सूरज ढलता है, इस काउंटर पर लोगों का तांता लग जाता है। इसमें ऑफिस से घर लौटते हुए कर्मचारी, कॉलेज के छात्र और शाम के वक्त बाजार घूमने निकले पूरे परिवार शामिल होते हैं। यह जगह केवल लस्सी बेचने का केंद्र नहीं है, बल्कि शहर के लोगों के लिए एक मिलन स्थल जैसा बन गया है। दरभंगा टावर के पास स्थित यह दुकान अब शहर की एक सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। यहाँ आने वाले लोग न केवल इस लस्सी का स्वाद लेते हैं, बल्कि वे दरभंगा की शाम और यहाँ की स्वादिष्ट यादों को अपने साथ संजोकर ले जाते हैं। यही वजह है कि आज भी यह दुकान अपनी पुरानी चमक और स्वाद के साथ शहर में बनी हुई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप