रांची के मोराबादी मैदान में किसान मेला: एक ही जगह तकनीक, वर्कशॉप और वैश्विक बाजार तक पहुंच झारखंड एक महीने पहले 50
रांची के मोराबादी मैदान में तीन दिवसीय निशुल्क कृषि व्यापार मेला चल रहा है, जहां किसानों को नई तकनीक, स्टार्टअप, फसल बीमा और आमदनी दोगुनी करने के तरीके सिखाए जा रहे हैं.

रांची के मोराबादी मैदान में इन दिनों किसानों के लिए एक खास आयोजन हो रहा है. यहां तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेला लगा है, जो किसानों के लिए पूरी तरह निशुल्क है. इस मेले में किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, नई फसलों और फसल बीमा से जुड़ी जानकारी एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही है.

एक ही जगह मिल रही हर जरूरी जानकारी

मेले में किसान अपनी मिट्टी की गुणवत्ता की जांच कराने और अपनी फसल को बाजार में ब्रांड के रूप में पेश करने के तरीके सीख सकते हैं. इनके लिए विशेष वर्कशॉप भी आयोजित की जा रही हैं, ताकि वे खेती के साथ-साथ कारोबार की बारीकियां भी समझ सकें.

कंपनी शुरू करने से लेकर सांस्कृतिक रंग तक

मेले में किसानों को अपनी कंपनी शुरू करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है, जिसे लेकर उनमें खासा उत्साह देखा जा रहा है. कृषि तकनीकों के साथ-साथ यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो रहे हैं, जहां लोग झारखंड के पारंपरिक गीतों का आनंद ले रहे हैं. इसके अलावा आने वाले लोगों के लिए खाने-पीने की भी बेहतरीन व्यवस्था की गई है.

वैश्विक बाजार तक पहुंचे प्रगतिशील किसान

इस मेले में कई ऐसे प्रगतिशील किसान मौजूद हैं, जिन्होंने अपने उत्पादों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाया है. इन्हीं में से एक इंदु प्रकाश हैं, जो लेमनग्रास की खेती करते हैं और उससे तैयार तेल को अंडमान-निकोबार तक भेज रहे हैं. यहां किसानों को ऐसे सफल लोगों से मिलने का अवसर मिल रहा है, जिन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अपनी बड़ी कंपनियां खड़ी कर दी हैं.

एक एकड़ से दोगुनी आमदनी के गुर

कृषि पदाधिकारी जयप्रकाश ने बताया कि मेले में किसानों को ऑर्गेनिक और बायोकेमिकल खाद के साथ फर्टिलाइजर बनाने की विधि सिखाई जा रही है. साथ ही उन्हें यह भी समझाया जा रहा है कि महज एक एकड़ जमीन का सही और अधिकतम उपयोग कर वे अपनी आमदनी कैसे दोगुनी कर सकते हैं.

कच्चे माल से वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट तक

मेले में ऐसे कई स्टॉल लगे हैं, जहां किसान रागी उगाने के साथ-साथ उसके लड्डू और आटा तैयार कर खुद ही मार्केटिंग कर रहे हैं. यहां पहुंचकर दूसरे किसान आसानी से देख और समझ सकते हैं कि अपने कच्चे माल को मूल्य वर्धित उत्पाद यानी वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट में बदलकर बाजार में कैसे बेचा जाए और आमदनी को दोगुना कैसे किया जाए.

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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