झारखंड
एक महीने पहले
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विचारों
झारखंड में ऑनलाइन कैब सेवा पर संकट
झारखंड के तीन प्रमुख शहरों, रांची, जमशेदपुर और बोकारो में रविवार से ऑनलाइन कैब ड्राइवरों ने एक बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। ओला, उबर और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्स से जुड़े हजारों चालकों ने काम काज पूरी तरह से ठप कर दिया है। इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते इन शहरों में ऑनलाइन टैक्सी सेवा पाने की कोशिश कर रहे आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो इस हड़ताल में कुल 13,000 से अधिक कैब ड्राइवर शामिल हैं। केवल रांची की बात करें, तो यहां लगभग 4,000 चालक सड़कों से गायब हैं और अपने वाहनों को स्टैंड पर खड़ा कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
क्यों मजबूर हुए ड्राइवर?
झारखंड प्रदेश टैक्सी यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया है। चालकों की आय में लगातार हो रही गिरावट ने उन्हें इस चरम सीमा पर पहुंचने के लिए मजबूर कर दिया है। यूनियन की मुख्य चिंताएं इस प्रकार हैं:
- ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी: पिछले काफी समय से पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, जबकि ऑनलाइन कैब कंपनियां यात्रियों से लिए जाने वाले किराए में उस अनुपात में कोई इजाफा नहीं कर रही हैं।
- आय का संकट: भाड़े की दरों में बदलाव न होने के कारण चालकों की जेब पर बुरा असर पड़ रहा है और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
- निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग: सफेद नंबर प्लेट वाली निजी कारों का व्यावसायिक टैक्सी के रूप में इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है, जिस पर प्रशासन कोई रोक नहीं लगा पा रहा है। इसका सीधा असर कमर्शियल टैक्सी ड्राइवरों के रोजगार पर पड़ा है।
- आईडी बंद करने की मनमानी: ड्राइवरों का आरोप है कि कंपनियां बिना किसी स्पष्ट कारण या सुनवाई का मौका दिए उनकी ड्राइवर आईडी बंद कर देती हैं, जिससे उनका काम ठप हो जाता है।
- सुविधाओं का अभाव: हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर काम करने वाले ड्राइवरों के लिए बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। साथ ही, कुछ एजेंटों द्वारा की जाने वाली अवैध वसूली भी ड्राइवरों के लिए सिरदर्द बनी हुई है।
तीन बड़े शहरों में जनजीवन प्रभावित
इस हड़ताल का असर केवल रांची तक सीमित नहीं है। राज्य के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र जमशेदपुर और बोकारो में भी टैक्सी सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। 13,000 चालकों के सड़कों से हटने का मतलब है कि राज्य के इन तीनों बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन का एक बड़ा आधार अचानक खत्म हो गया है। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने पहले ही अपना मांगपत्र कंपनियों को सौंप दिया था और हड़ताल की चेतावनी भी दी थी, लेकिन कंपनियों की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। इसी उदासीनता के कारण अब चालकों ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है।
यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबतें
टैक्सी सेवा बंद होने के कारण आम लोगों की दिनचर्या पर गहरा असर पड़ेगा। विशेष रूप से उन लोगों को बहुत कष्ट होगा जो अपनी यात्रा के लिए पूरी तरह इन ऐप्स पर निर्भर थे। संभावित चुनौतियों में शामिल हैं:
- हवाई यात्रा करने वाले: जो लोग एयरपोर्ट जा रहे हैं या वहां से घर लौटने की योजना बना रहे हैं, उन्हें समय पर वाहन नहीं मिल पाएगा, जिससे उनकी फ्लाइट छूटने का गंभीर खतरा है।
- रेलवे स्टेशन की आवाजाही: स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों, विशेषकर भारी सामान के साथ सफर करने वाले परिवारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
- चिकित्सीय आपातकाल: अस्पतालों में जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह हड़ताल सबसे ज्यादा कष्टदायक है। एंबुलेंस के अलावा कैब ही सबसे विश्वसनीय साधन होती है, जो फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
- सुरक्षा के सवाल: रात के समय यात्रा करने वाले अकेले यात्रियों और महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन के विकल्प बेहद सीमित हो गए हैं।
फिलहाल, यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही कर लें, क्योंकि यूनियन ने तब तक पीछे हटने से मना कर दिया है जब तक उनकी पांच सूत्री मांगों पर कोई सकारात्मक विचार नहीं किया जाता।
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