मां की मजदूरी और बेटी का जज्बा: मिट्टी के घर से अंतरराष्ट्रीय मैदान तक दिव्यानी लिंडा का सफर झारखंड 7 घंटे पहले 4
रांची के माझी परखर स्थित चरदी गांव की दिव्यानी लिंडा भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम की सदस्य हैं। मिट्टी के घर में बीते कठिन बचपन से निकलकर उन्होंने अपने खेल के बल पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है।

झारखंड की राजधानी रांची के माझी परखर इलाके में बसे चरदी गांव की दिव्यानी लिंडा आज सिर्फ फुटबॉल के मैदान पर ही नहीं, बल्कि अपने संघर्ष और कामयाबी के सफर से भी लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस खिलाड़ी और भारत की अंडर-17 महिला टीम की सदस्य की कहानी जुझारूपन और सफलता की जीती-जागती मिसाल है। जिस घर में कभी कदम-कदम पर मुश्किलें खड़ी रहती थीं, उसी के बगल में अब एक पक्का मकान आकार ले रहा है, जो उनके सपनों की ऊंची उड़ान का प्रतीक बन चुका है।

मिट्टी के घर में बीता बचपन

दिव्यानी का बचपन एक मिट्टी के घर में गुजरा, जहां सुविधाओं का अभाव और रोजमर्रा की जद्दोजहद आम बात थी। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकना और रातों को डर के साये में समय काटना उनकी जिंदगी का हिस्सा रहा। कई मौकों पर घर में सांप घुस आने की घटनाओं ने पूरे परिवार को दहशत में डाल दिया था।

मां और दादी का संघर्ष

दिव्यानी के पिता का निधन चार साल पहले हो गया था। इसके बाद घर-परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां ने मजदूरी करके संभाली। दादी भी मेहनत-मजदूरी कर घर चलाने में हाथ बंटाती हैं। तमाम कठिनाइयों के बीच भी परिवार ने हिम्मत नहीं हारी और दिव्यानी के सपनों को साकार करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी।

फुटबॉल ने बदल दी जिंदगी

आज दिव्यानी भारतीय महिला अंडर-17 टीम की अहम कड़ी हैं। वह डिफेंडर यानी राइट फुल बैक की भूमिका में खेलती हैं और अब तक चीन, किर्गिस्तान, भूटान, नेपाल और रूस जैसे देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उनकी लगातार मेहनत ने ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

1500 स्क्वायर फीट का सपनों का घर

अब दिव्यानी के मौजूदा घर से ठीक सटे हुए 1500 स्क्वायर फीट का एक पक्का मकान तैयार हो रहा है। इसमें तीन कमरे, एक बालकनी, दो बाथरूम और आधुनिक सुविधाएं होंगी। यह मकान महज एक निर्माण नहीं, बल्कि एक सपने के पूरा होने की कहानी है।

परिवार की खुशी और भावनाएं

इस बदलाव से दिव्यानी की मां और दादी बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि बेटी की मेहनत ने पूरे परिवार की तकदीर बदल दी है। दादी भावुक होकर कहती हैं कि अब घर में डर नहीं, बस सुकून का माहौल है।

समाज और जनप्रतिनिधियों का सहयोग

दिव्यानी के परिवार को स्थानीय समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों का भी साथ मिला। इसी दौरान उनके भाई के इलाज को लेकर मदद का भरोसा दिलाया गया, जिससे परिवार को बड़ी राहत मिली।

अगला लक्ष्य: सीनियर टीम में जगह

दिव्यानी का अगला सपना भारतीय महिला सीनियर फुटबॉल टीम में जगह बनाना है। उनका मानना है कि मेहनत और अनुशासन के दम पर हर सपने को हकीकत में बदला जा सकता है।

प्रेरणा देती कहानी

दिव्यानी लिंडा का सफर इस बात की गवाही देता है कि अगर हौसले और मेहनत का साथ हो, तो मिट्टी के घर से भी कामयाबी का महल खड़ा किया जा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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