उपनाम: संघर्ष की कहानी
इलाज के पैसे नहीं थे, छोटे-मोटे काम करके गुजारा करते थे ये मशहूर सिंगर; आज है करोड़ों की संपत्ति के मालिक
पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे वे कभी भारी आर्थिक तंगी और गरीबी के बीच पले-बढ़े थे। आज दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने वाले दिलजीत के लिए एक समय डॉक्टर की फीस चुकाना भी मुश्किल था।
भेड़ें चराने से फीफा वर्ल्ड कप के हीरो बनने तक, ऐसी है अलीरेजा बेइरानवांद के संघर्ष की दास्तान
फीफा विश्व कप 2026 में ईरान के गोलकीपर अलीरेजा बेइरानवांद ने अपने शानदार खेल से सबको हैरान कर दिया है। एक समय सड़कों पर कार धोने और मस्जिदों में सोने वाले अलीरेजा का सफर किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है।
8 बार नाकाम हुए, कुल्फी बेचकर पाला परिवार! 9वीं कोशिश में बिहार पुलिस में चयन, धीरज की प्रेरक कहानी
जहानाबाद के धीरज कुमार ने आठ बार असफल होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और नौवें प्रयास में बिहार पुलिस में जगह बनाई। जिस समय मेरिट लिस्ट जारी हुई, उस वक्त वे बाजार में मटका कुल्फी बेच रहे थे।
नवाज और विजय राज को थिएटर में बनना पड़ता था 'पेड़', मनोज बाजपेयी ने सुनाए दिलचस्प किस्से
मनोज बाजपेयी ने अपने थिएटर के दिनों को याद करते हुए बताया कि शुरुआत में रोल न मिलने पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी और विजय राज को एक नाटक में ढाई-ढाई घंटे पेड़ बनकर खड़ा रहना पड़ता था।
मां की मजदूरी और बेटी का जज्बा: मिट्टी के घर से अंतरराष्ट्रीय मैदान तक दिव्यानी लिंडा का सफर
रांची के माझी परखर स्थित चरदी गांव की दिव्यानी लिंडा भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम की सदस्य हैं। मिट्टी के घर में बीते कठिन बचपन से निकलकर उन्होंने अपने खेल के बल पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है।
पिता के साथ फुटपाथ पर बेची सब्जी, बमुश्किल जुटाई स्कूल की फीस, आज विदेश में सीए बनकर कमा रहे लाखों
मुंबई के विक्रोली की तंग गलियों में पले-बढ़े अभिषेक वैश्य सुबह तीन बजे पिता के साथ सब्जी बेचा करते थे। आज वही युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट बनकर ओमान और यूएई में अपनी फर्म चला रहे हैं।
कैंसर ने छीना पिता का साया, मां ने सिलाई कर पढ़ाया, अब जिगर बनेगा गांव का पहला IITian
ओडिशा के एक छोटे से गांव के जिगर नायक ने जेईई-एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 17783 हासिल की है। पिता को कैंसर में खोने के बाद उनकी मां ने टेलरिंग कर बेटे का सपना पूरा किया।
अखबार बांटने से लेकर अपने ब्रांड तक: जमशेदपुर के मनप्रीत की प्रेरक यात्रा
तीन साल की उम्र में पिता को खोने वाले जमशेदपुर के 21 वर्षीय मनप्रीत सिंह ने बचपन से मेहनत कर आज 'Shades of Punjab' नाम से अपना कपड़ा ब्रांड खड़ा किया है, जिसके शहर में दो आउटलेट चल रहे हैं।