झारखंड
एक घंटा पहले
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विचारों
रांची के धरना स्थल पर चर्चा का माहौल
झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों एक बड़े छात्र आंदोलन का केंद्र बनी हुई है। शहर के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे विरोध प्रदर्शन को अब लोग रांची के जंतर-मंतर के रूप में देखने लगे हैं। जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। इस बीच, आंदोलन स्थल पर लगे पोस्टरों ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। एक तरफ छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को झारखंड का सोनम वांगचुक बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ पेपर लीक मामले के आरोपी अभय तिवारी को फिल्म 'शोले' के किरदार 'सूरमा भोपाली' का नाम देकर तंज कसा गया है।
देवेंद्र नाथ महतो का संघर्ष
देवेंद्र नाथ महतो इस पूरे आंदोलन के मुख्य चेहरे बनकर उभरे हैं। वे छात्रों की मांगों को लेकर आमरण अनशन कर रहे हैं। स्टेडियम में लगे पोस्टरों के मुताबिक, उनका यह सत्याग्रह 25 जुलाई 2026 से चल रहा है, जबकि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की शुरुआत 2 अगस्त से हुई है। देवेंद्र का दृढ़ संकल्प है कि जब तक जेपीएससी और जेएसएससी की पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हो जाती और व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं होता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
देवेंद्र नाथ महतो मूल रूप से रांची जिले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव के निवासी हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सरकारी स्कूल से पूरी की। वे अपनी शैक्षणिक योग्यता में मैट्रिक और इंटर के बाद स्नातक, बी.एड और दो विषयों में प्रथम श्रेणी से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल कर चुके हैं। संस्कृत और क्षेत्रीय भाषाओं में उच्च शिक्षित होने के बावजूद, उन्होंने निजी करियर के बजाय छात्रों के हितों की रक्षा करने का कठिन रास्ता चुना है।
कौन हैं अभय तिवारी?
विरोध कर रहे छात्रों का आरोप है कि झारखंड सिविल सेवा परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है और वे इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इस विवाद के केंद्र में गोड्डा जिले में तैनात ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर अभय तिवारी का नाम आया है। सीआईडी ने अभय तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें पेपर लीक रैकेट का कथित मास्टरमाइंड माना जा रहा है। इसी कारण से आंदोलनकारी छात्रों ने उन पर निशाना साधते हुए उन्हें सूरमा भोपाली के उपनाम से संबोधित किया है।
14वीं जेपीएससी परीक्षा का विवाद
यह पूरा विवाद 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 के परिणामों से शुरू हुआ, जो 2 जुलाई को जारी किए गए थे। रिजल्ट आते ही छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए आंदोलन की शुरुआत कर दी। प्रदर्शनकारी छात्रों ने ओएमआर शीट, पूरी परीक्षा प्रक्रिया और परिणामों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा को रद्द करना, पूरे मामले की सीबीआई जांच कराना और भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाना शामिल है। छात्रों ने सरकार से यह भी कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे गड़बड़ी से जुड़े ठोस दस्तावेज और साक्ष्य उपलब्ध कराएंगे। जवाब में सरकार ने भी छात्रों से परीक्षा में हुई अनियमितताओं के ठोस प्रमाण मांगे हैं।
सरकार और छात्रों के बीच वार्ता
बीते शनिवार को इस आंदोलन को लेकर सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर हुए। स्टेट गेस्ट हाउस में मंत्रियों ने छात्र प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक की। सरकार ने विभिन्न छात्र संगठनों से अलग-अलग चर्चा की और उनसे सुझाव तथा सबूत ईमेल के माध्यम से साझा करने को कहा। छात्रों का दावा है कि उन्होंने न केवल जेपीएससी, बल्कि जेएसएससी सीजीएल समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली के भी सबूत सरकार को सौंप दिए हैं। छात्रों ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि जब तक सरकार की ओर से कोई ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे आंदोलन को समाप्त नहीं करेंगे।
विधानसभा घेराव की चेतावनी
सरकार के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद, छात्रों ने अब विधानसभा घेराव का ऐलान कर दिया है। आंदोलनकारी छात्रों ने पूरे राज्य के अभ्यर्थियों से रांची पहुंचने की अपील की है ताकि इस मांग को और मजबूती दी जा सके। एबीवीपी सहित कई अन्य छात्र संगठनों ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन देने का एलान किया है। वहीं, विपक्ष के नेताओं ने भी इस मामले को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को छात्रों की जायज मांगों पर तुरंत निर्णय लेना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वे छात्रों की बात ध्यान से सुन रहे हैं और सौंपे गए दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।
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