उज्जैन: महाकाल मंदिर के करीब स्थित शाही मस्जिद का विवाद और इसका ऐतिहासिक महत्व मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 3
मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर उपजे विवाद और तनाव के बीच जानिए इस 600 साल पुरानी मस्जिद की दूरी और इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

उज्जैन में मस्जिद पर बवाल और ताजा स्थिति

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित शाही मस्जिद को गिराए जाने की कार्रवाई के दौरान माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। इस घटना के विरोध में स्थानीय निवासियों ने पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों पर जमकर पथराव किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। फिलहाल, पूरे इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू है और प्रशासन स्थिति को सामान्य बनाने में जुटा हुआ है।

महाकाल मंदिर से दूरी

यह शाही मस्जिद उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर से काफी करीब स्थित है। यदि आप मंदिर से इस मस्जिद तक की दूरी जानना चाहते हैं, तो इसके लिए अलग-अलग रास्ते और माध्यमों के हिसाब से आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • पैदल दूरी: महाकाल मंदिर से मस्जिद की दूरी महज 1.2 किलोमीटर है, जिसे तय करने में करीब 17 मिनट का समय लगता है।
  • सड़क मार्ग: यदि आप कार या बाइक जैसे वाहन से यात्रा करते हैं, तो मंदिर से मस्जिद तक पहुँचने के लिए लगभग 2.3 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।
  • सामान्य अनुमान: आधिकारिक तौर पर मंदिर परिसर से मस्जिद की दूरी लगभग 1 किमी से 2 किलोमीटर के बीच मानी जाती है।

600 साल पुराना इतिहास

शाही मस्जिद का इतिहास काफी प्राचीन और चर्चा का विषय रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मस्जिद का निर्माण करीब 636 साल पहले यानी वर्ष 1390 में किया गया था। इस स्थल से जुड़ी एक ऐतिहासिक जानकारी यह भी है कि ग्वालियर सरकार द्वारा वर्ष 1925 में एक पत्र लिखा गया था। उस दौर में जब सार्वजनिक आवश्यकता पड़ी थी, तब मस्जिद की तरफ से स्वेच्छा से अपनी जमीन का 8 फीट हिस्सा सरकार को प्रदान किया गया था। आज इसी पुरानी संरचना और इसके आसपास के इलाके को लेकर चल रही कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही ने उज्जैन में भारी विवाद को जन्म दे दिया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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