झारखंड
एक घंटा पहले
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विचारों
सरकार और छात्रों के बीच वार्ता का नया दौर
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत छात्रों और हेमंत सरकार के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य के रांची स्थित मोरहाबादी में बने स्टेट गेस्ट हाउस में सरकारी प्रतिनिधियों और छात्र संगठनों के बीच बैठकों का सिलसिला जारी है। हालांकि, सरकार द्वारा बातचीत के लिए कदम उठाए जाने के बाद भी आंदोलन से जुड़ी मुख्य मांगों को लेकर अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है, जिसके कारण गतिरोध बरकरार है।
ईमेल आईडी के जरिए मांगे गए सुझाव
सरकार ने इस मामले को सुलझाने के लिए एक समावेशी दृष्टिकोण अपनाते हुए सभी छात्र संगठनों तक पहुंचने का निर्णय लिया है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि सरकार किसी एक संगठन तक अपनी बातचीत को सीमित नहीं रखेगी। छात्रों की ओर से आ रहे विभिन्न सुझावों और मांगों को आधिकारिक तौर पर दर्ज करने के लिए एक विशेष ईमेल आईडी जारी की गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि राज्य में मौजूद अलग-अलग छात्र गुट अपनी बात और अपने तर्क सरकार तक सीधे पहुंचा सकें। सरकार का मानना है कि सभी समूहों से चर्चा करने के बाद ही एक अंतिम और सर्वमान्य समाधान तक पहुंचा जा सकेगा।
जेएलकेएम गुट के साथ चली लंबी बैठक
शनिवार को सरकार ने जेएलकेएम से जुड़े छात्र प्रतिनिधियों के साथ दूसरे दौर की औपचारिक वार्ता की। मोरहाबादी के स्टेट गेस्ट हाउस में आयोजित यह बैठक लगभग पौने दो घंटे तक चली। इस चर्चा के दौरान जेपीएससी और जेएसएससी से संबंधित विभिन्न भर्ती विसंगतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और अन्य सरकारी अधिकारियों ने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को पूरी गंभीरता के साथ सुना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि अलग-अलग गुटों में बंटे हुए छात्रों के बीच से एक साझा और सकारात्मक रास्ता निकाला जाए।
शुक्रवार की बैठक और शुरुआती संकेत
इस पूरी बातचीत की प्रक्रिया की शुरुआत शुक्रवार को हुई थी, जब सरकार और जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के प्रतिनिधियों के बीच पहली आधिकारिक मुलाकात हुई थी। लगभग दो घंटे तक चली उस बैठक में छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी, परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था में खामियों और अनियमितताओं के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया था। उस समय सरकारी पक्ष ने छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिया था। छात्र प्रतिनिधियों का भी यह मानना था कि बातचीत का माहौल सकारात्मक रहा और कई बिंदुओं पर सरकार का रुख नरम दिखाई दिया, लेकिन ठोस परिणाम की अभी प्रतीक्षा है।
सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने पर फंसा है पेंच
वार्ता के दौरान सबसे बड़ी बाधा 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने को लेकर है। प्रदर्शनकारी छात्रों की यह प्रमुख मांग है कि भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित धांधलियों की जांच सीबीआई से कराई जाए, या फिर राज्य से बाहर के सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की एक कमेटी गठित कर इसकी जांच पूरी की जाए। इन दोनों ही मांगों को लेकर सरकार की ओर से फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यही कारण है कि बातचीत शुरू होने के बावजूद छात्र आंदोलन और सत्याग्रह के रास्ते पर बने हुए हैं।
आंदोलन जारी रहने का फैसला
दिलचस्प बात यह है कि सरकारी स्तर पर पहल होने के बावजूद छात्रों ने अपना धरना समाप्त करने से साफ इनकार कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार तक यह आंदोलन अपने 14वें दिन में प्रवेश कर चुका था और इस दौरान कुल छह प्रदर्शनकारी छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती, तब तक सत्याग्रह जारी रहेगा।
अगली दिशा की ओर नजर
वर्तमान स्थिति यह है कि सरकार ने छात्रों की सुनी-अनसुनी शिकायतों के बीच एक संवाद का पुल बनाने की कोशिश की है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जब सरकार सभी छात्र संगठनों से चर्चा की प्रक्रिया पूरी कर लेगी, तो उसके बाद वह 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और सीबीआई जांच जैसी मांगों पर क्या अंतिम फैसला लेती है। फिलहाल यह साफ है कि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बातचीत के जरिए समाधान ढूंढ रही है, लेकिन गतिरोध की मुख्य कड़ी अब भी अपनी जगह पर स्थित है।
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