झारखंड
एक घंटा पहले
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झारखंड में सक्रिय हुआ मानसून
झारखंड के निवासियों को अब तेज गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि मौसम विभाग ने राज्य भर में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी कर दिया है। यह चेतावनी शनिवार से शुरू होकर 3 अगस्त तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में घने बादल छाए रहने और रुक-रुककर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होने का अनुमान है। मौसम केंद्र रांची के अनुसार, मानसून की गतिविधियों में तेजी आने से राज्य को सूखे जैसे हालात से राहत मिल सकती है।
दोपहर बाद वज्रपात का खतरा
मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। खासकर दोपहर से लेकर शाम के वक्त गर्जन के साथ तेज बारिश की संभावना अधिक है। इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जो सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में आकाशीय बिजली गिरने का भी भारी खतरा बना हुआ है। विभाग ने आम जनता से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में जाने से बचें।
इन 7 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
संथाल परगना क्षेत्र में मानसून का असर सबसे अधिक देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने विशेष रूप से 7 जिलों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज शामिल हैं। इन क्षेत्रों में प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।
तापमान में होगी मामूली बढ़ोतरी
आने वाले 24 घंटों के दौरान राज्य के अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव आने की संभावना नहीं है। हालांकि, मौसम के जानकारों का कहना है कि इसके बाद अगले चार दिनों में पारे में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उमस भरी गर्मी बढ़ सकती है।
राज्य में बारिश की कमी बरकरार
झारखंड में अब भी मानसून की स्थिति संतोषजनक नहीं है। अगर आंकड़ों पर गौर करें, तो 1 जून से 29 जुलाई तक राज्य में सामान्यतः 489.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इसके मुकाबले केवल 362.8 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है। यह औसत से 25 प्रतिशत कम है। गढ़वा में 62 प्रतिशत और चतरा में 61 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय है। राजधानी रांची में भी सामान्य से 15 प्रतिशत कम पानी बरसा है। वहीं, पश्चिमी सिंहभूम एकमात्र ऐसा जिला है जहां सामान्य से 19 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बारिश का यह सिलसिला राज्य के जल स्तर में सुधार लाएगा।
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