उत्तर प्रदेश
2 घंटे पहले
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अयोध्या चंदा चोरी: जांच का दायरा बढ़ा
राम मंदिर चंदा चोरी के मामले में जांच के दौरान एक के बाद एक नई परतें खुल रही हैं। इस पूरे प्रकरण में केवल अनुकल्प और लवकुश ही नहीं, बल्कि टिन्नू यादव सहित कुल आठ आरोपी शामिल हैं। राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इन सभी के पास से अब तक लगभग 80 लाख रुपए की रिकवरी की है। इस पूरे घोटाले में सबसे ज्यादा हैरानी वाली बात यह है कि बरामद की गई राशि का एक बड़ा हिस्सा अविनाश शुक्ला के पास से मिला है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अयोध्या पुलिस ने जेल में बंद अविनाश शुक्ला से दो घंटे तक कड़ाई से पूछताछ की है।
अविनाश शुक्ला और योग सेंटर का कनेक्शन
जांच में यह बात सामने आई है कि अविनाश शुक्ला अपने भाई अभिषेक शुक्ला के साथ एक योग केंद्र में रहता था। वहां एक रहस्यमयी बक्सा रखा हुआ था, जिस पर ताला लगा था। 5 जून को जब पुलिस की टीम ने उस योग सेंटर पर छापेमारी की, तो वहां से 5 लाख रुपए नकद बरामद किए गए। इस दौरान का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया था, जिसमें पुलिस अविनाश को हिरासत में लेकर ले जा रही है और पुलिसकर्मी के हाथ में एक काला बैग है, जिसमें योग सेंटर से जब्त की गई नकदी रखी है। गौरतलब है कि अविनाश के भाई अभिषेक ने ही उसे मंदिर में नौकरी दिलवाई थी। अविनाश का मुख्य काम मंदिर में आने वाले दान की राशि को काउंटिंग रूम तक सुरक्षित पहुंचाना था, लेकिन उसने अपने पद का दुरुपयोग किया।
राम राज्य कोष और दान की राशि
कौशालपुरी फेज-2 स्थित योग केंद्र में अविनाश शुक्ला का कुछ सामान अभी भी छूट गया था, जहां वह पहले रहा करता था। उसी परिसर में एक छोटा बक्सा मिला है, जिस पर राम राज्य कोष लिखा है और साथ में एक क्यू-आर कोड भी चिपकाया गया है। यह बक्सा योग केंद्र चलाने वाले व्यक्ति का बताया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल मंदिर निर्माण से पहले और दौरान चंदा इकट्ठा करने के लिए किया जाता था।
पुलिस ने पूछे तीखे सवाल
अविनाश शुक्ला से जेल में की गई पूछताछ के दौरान पुलिस ने उससे कई अहम सवाल किए, जिनमें प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- उसके पास इतनी बड़ी मात्रा में नकदी कहां से आई और इसके पीछे के असली स्रोत क्या थे?
- वह राम मंदिर में किस तारीख से नौकरी कर रहा था?
- क्या उसने नौकरी के पहले दिन से ही दान के पैसे चोरी करने शुरू कर दिए थे?
- मंदिर से चोरी की गई राशि को वह बाहर कैसे लेकर जाता था और उसका तरीका क्या था?
- क्या उसने चोरी के लिए कपड़ों में कोई विशेष सीक्रेट जेब या बैग का इस्तेमाल किया था?
- चढ़ावे की चोरी से उसने अब तक क्या-क्या भौतिक संपत्तियां खरीदी हैं?
- क्या उसकी पत्नी भी इस पूरे गबन के षड्यंत्र में शामिल थी?
- क्या चोरी के रुपयों से उसने अपनी पत्नी को गहने खरीद कर दिए थे?
दान प्रबंधन की व्यवस्था
राम मंदिर में श्रद्धालु दान पात्रों में पैसे डालने के अलावा काउंटरों पर भी नकदी दान करते हैं, जिसके बदले उन्हें रसीद दी जाती है। अब पुलिस इन रसीद बुक्स की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि काउंटर पर आया पूरा पैसा बैंक में जमा हुआ है या नहीं। फिलहाल राम मंदिर परिसर में दान के लिए तीन मुख्य काउंटर बने हुए हैं, जिनमें पहला यात्री सुविधा केंद्र के पीछे, दूसरा रंगमहल बैरियर के पास स्थित पुराने ट्रस्ट कार्यालय में और तीसरा मीडिया सेंटर के पास बने नए कार्यालय में है। इसके अतिरिक्त, मंदिर परिसर में कुल 40 दान पात्र भी लगाए गए हैं।
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