राजू पाल हत्याकांड: दोषियों की जमानत रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं पूजा पाल, CBI ने भी किया जोरदार समर्थन उत्तर प्रदेश 3 घंटे पहले 2
प्रयागराज के बहुचर्चित राजू पाल हत्याकांड के दोषियों को मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जहां याचिकाकर्ता पूजा पाल के साथ-साथ CBI ने भी जमानत निरस्त करने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का सबसे चर्चित राजू पाल हत्याकांड एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे पर पहुंच गया है। इस सनसनीखेज मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दो दोषियों, आबिद प्रधान और जावेद को मिली जमानत पर अब कानून का शिकंजा कसने लगा है। दिवंगत बसपा विधायक राजू पाल की पत्नी और वर्तमान विधायक पूजा पाल ने इन दोनों की जमानत रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों दोषियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद की जाएगी। खास बात यह है कि इस याचिका का केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी पुरजोर समर्थन किया है और अदालत से इन दोनों की जमानत रद्द करने की मांग की है।

जमानत याचिका पर उठे गंभीर सवाल, तथ्यों को छिपाने का आरोप

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पूजा पाल के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि जनवरी 2005 में राजू पाल समेत तीन लोगों की दिनदहाड़े सरेराह हत्या कर दी गई थी। इस भीषण हमले में अपराधियों ने AK-47 जैसे अत्यंत घातक और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था। याचिका में दावा किया गया है कि आबिद प्रधान और जावेद ने जमानत हासिल करते समय न्यायपालिका के सामने अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि और इस मामले से जुड़े कई अहम तथ्यों को छिपाकर रखा। इसी धोखे को आधार बनाते हुए उनकी जमानत को निरस्त करने की मांग की गई है।

क्या था बहुचर्चित राजू पाल हत्याकांड?

यह खूनी संघर्ष करीब दो दशक पुराना है, जब जनवरी 2005 में प्रयागराज में तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की गोलियों से भूनकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस घटना के तुरंत बाद उनकी पत्नी पूजा पाल ने धूमनगंज थाने में इस जघन्य हत्याकांड का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने जांच के बाद तत्कालीन बाहुबली सांसद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ उर्फ खालिद अजीम समेत कई आरोपियों को नामजद किया था। 6 अप्रैल 2005 को पुलिस ने जांच प्रक्रिया पूरी करते हुए अतीक और अशरफ समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया था।

इस हत्याकांड की गवाही देना भी मौत को दावत देने जैसा साबित हुआ। मामले के मुख्य गवाह उमेश पाल लगातार आरोपियों के निशाने पर रहे। आखिरकार फरवरी 2023 में धूमनगंज इलाके में स्थित उनके घर के बाहर अपराधियों ने बम और गोलियों से हमला कर उमेश पाल को मौत के घाट उतार दिया। इस भीषण हमले में उमेश पाल की सुरक्षा में तैनात दो सुरक्षाकर्मी भी वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस दोहरे हत्याकांड का आरोप भी अतीक अहमद और उसके पूरे गिरोह पर लगा था।

पुलिस हिरासत के दौरान अतीक-अशरफ का अंत

राजू पाल हत्याकांड के मुख्य सूत्रधार रहे अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ का अंत भी बेहद नाटकीय रहा। अप्रैल 2023 में प्रयागराज में पुलिस हिरासत के दौरान जब इन दोनों को चिकित्सीय परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा था, तब मीडिया से बातचीत के दौरान पत्रकारों के भेष में आए हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। सरेआम हुई इस हत्या से पूरे राज्य की कानून व्यवस्था हिल गई थी और इस घटना ने देशभर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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