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2 घंटे पहले
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विचारों
डिफेंस सेक्टर में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान देश के रक्षा क्षेत्र में आ रहे सकारात्मक बदलावों पर प्रकाश डाला। रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक के दौरान भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन में लगभग 4 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब बढ़कर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके साथ ही रक्षा निर्यात के आंकड़ों में भी उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है, जो अब लगभग 39 हजार करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है। राजनाथ सिंह ने ये बातें व्हीकल फैक्टरी जबलपुर में टी-सीरीज बैटल टैंक्स की मरम्मत और रखरखाव के लिए 472 करोड़ रुपये की लागत वाली एक अत्याधुनिक सुविधा की आधारशिला रखने के बाद कहीं।
रक्षा निर्यात का सफर: 1 हजार करोड़ से 39 हजार करोड़ तक
रक्षा मंत्री ने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन मात्र 46 हजार करोड़ रुपये था, जो आज बढ़कर 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये हो गया है। निर्यात के मोर्चे पर भी स्थिति काफी सुधरी है। साल 2014 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट करीब 1 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 39 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह विकास भारत के रक्षा उद्योग की वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
वर्ष 2028-29 तक 50 हजार करोड़ का लक्ष्य
सरकार की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय के लिए सरकार ने बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। वित्त वर्ष 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत न केवल हथियारों का उत्पादन कर रहा है, बल्कि उनके रखरखाव, मरम्मत और अपग्रेडेशन की तकनीक भी विकसित कर रहा है।
जबलपुर प्रोजेक्ट से रोजगार और क्षमता का विस्तार
इस नई टैंक मरम्मत परियोजना को भारत के आत्मनिर्भर औद्योगिक इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया गया है। इस सुविधा के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस परियोजना के तहत हर साल T-72 और T-90 मॉडल के 80 टैंकों की मरम्मत सुनिश्चित की जाएगी।
सेना की जरूरतों को पूरा करने की तैयारी
रक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि भारतीय सेना को हर साल लगभग 230 टैंकों की मरम्मत की आवश्यकता होती है। वर्तमान में चेन्नई के अवाडी स्थित हैवी व्हीकल्स फैक्टरी प्रतिवर्ष लगभग 150 टैंकों की मरम्मत करने में सक्षम है। जबलपुर में स्थापित की जा रही नई सुविधा इस अंतर को भरेगी और बाकी बची हुई 80 टैंकों की सालाना मरम्मत की मांग को पूरा करेगी। इससे पहले स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भी राजनाथ सिंह ने पिछले 12 वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र में आए बड़े बदलावों और आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रही तेज प्रगति का उल्लेख किया था।
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