मोदी का नया कीर्तिमान: चाय बेचने वाले ने तोड़ा बैरिस्टर नेहरू का रिकॉर्ड भारत एक घंटा पहले 4
नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं और उन्होंने पंडित नेहरू के 4,398 दिन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव और बंगाल में तृणमूल नेताओं के खिलाफ जनाक्रोश भी चर्चा में है।

नरेंद्र मोदी अब भारत के ऐसे निर्वाचित प्रधानमंत्री बन चुके हैं, जिन्होंने सबसे लंबे समय तक बिना किसी रुकावट के यह पद संभाला है। उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू के 4,398 दिन के रिकॉर्ड को पार कर लिया है। इसी के साथ मोदी सरकार के 12 साल भी पूरे हो गए हैं। यह समझना ज़रूरी है कि नेहरू के मुकाबले मोदी का यह रिकॉर्ड इतना खास क्यों माना जा रहा है। पंडित नेहरू एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार की पृष्ठभूमि से आए थे, जबकि मोदी के परिवार का राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं रहा।

नेहरू के पिता नामी वकील थे, खुद नेहरू ने लंदन के Harrow School में शिक्षा पाई और बैरिस्टर बने। दूसरी ओर, मोदी के पिता रेलवे स्टेशन पर चाय की एक छोटी दुकान चलाते थे। उनकी मां गरीबी में दूसरों के घरों में बर्तन साफ करती थीं और मोदी खुद भी स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। आज़ादी की लड़ाई में नेहरू की बड़ी भूमिका थी और उन्हें महात्मा गांधी का संरक्षण प्राप्त था। इसके विपरीत मोदी ने अपनी राह खुद तय की। उन्होंने 30 साल तक RSS के प्रचारक के रूप में गली-गली और गांव-गांव की खाक छानी और जब से चुनावी राजनीति में उतरे, कभी हार का सामना नहीं किया।

मोदी की कामयाबी की एक बड़ी वजह यह रही कि प्रचारक के तौर पर घूमते हुए उन्होंने जो अनुभव बटोरा, वह आगे चलकर उनके बहुत काम आया। वे 13 साल तक मुख्यमंत्री रहे और इस दौरान हर दिन किसी न किसी चुनौती से भरा रहा। चारों ओर से हमले हो रहे थे और संकटों से जूझने का यही अनुभव बाद में उपयोगी साबित हुआ। प्रधानमंत्री बने हुए उन्हें 12 साल हो चुके हैं, इस बीच उन्होंने कोई छुट्टी नहीं ली और लगातार कड़ी मेहनत की। उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिनके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस दोनों जरूरी थे, जैसे Article 370 को हटाना और पाकिस्तान के भीतर घुसकर कार्रवाई करना। मोदी की यही मेहनत और हिम्मत उन्हें दूसरे प्रधानमंत्रियों से अलग खड़ा करती है। गरीबी से निकलकर आगे बढ़ना और संकट को अवसर में बदल देने की क्षमता ही उनके रिकॉर्ड और उपलब्धि को और बड़ा बना देती है।

नटराजन के खिलाफ साजिश किसने रची?

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ एक बड़ा खेल हो गया। राज्यसभा चुनाव में पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निर्वाचन अधिकारी ने खारिज कर दिया। एक छोटी-सी चूक के चलते कांग्रेस जीती हुई बाज़ी हार गई। सवाल यह है कि यह सब हुआ कैसे? यहां तीन सीटों पर चुनाव होने थे। BJP के पास दो सीटें जीतने के लिए ज़रूरी से अधिक वोट मौजूद थे, मगर तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 10 और विधायकों की दरकार थी। दूसरी ओर कांग्रेस के पास एक सीट जीतने भर के वोट तो थे ही, बल्कि 5 अतिरिक्त वोट भी थे। हर किसी को यही लग रहा था कि BJP आसानी से 2 और कांग्रेस 1 सीट जीत जाएगी, लेकिन BJP ने तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारकर सबको हैरान कर दिया।

कांग्रेस पूरी तरह सतर्क थी। उसे आशंका थी कि BJP उसके विधायकों में सेंध लगा सकती है, इसलिए सभी विधायकों को private jet से बैंगलुरु भेजने की तैयारी कर ली गई। मगर कांग्रेस के ही कुछ नेता मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी से नाखुश थे और उन्होंने चुपके से मीनाक्षी के खिलाफ एक पुराने फौजदारी मामले की जानकारी BJP तक पहुंचा दी। BJP ने इसकी शिकायत की और मीनाक्षी का नामांकन रद्द हो गया। अब BJP के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए जाएंगे। कांग्रेस के विधायक बैंगलुरु के Resort में आराम करने के लिए रवाना होने वाले थे, लेकिन विमान के उड़ान भरने से पहले ही पूरा खेल हो चुका था। इसे ही कहते हैं — कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना।

तृणमूल नेताओं पर अंडे कौन फेंक रहा है?

बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता जहां भी पहुंच रहे हैं, वहां लोग 'चोर-चोर' के नारे लगा रहे हैं और उन पर अंडे और टमाटर फेंक रहे हैं। कोलकाता एयरपोर्ट पर उतरते ही कल्याण बनर्जी के खिलाफ लोगों ने 'चोर-चोर' के नारे लगाए। बिधाननगर के मेयर सब्यसाची दत्ता को जब पुलिस अदालत में पेशी के लिए ले गई, तो वहां भी लोगों ने 'चोर-चोर' के नारे लगाए और उन पर अंडे-टमाटर फेंके। इसके बाद जब पुलिस सब्यसाची को अस्पताल ले गई, तो वहां भी लोगों ने उन पर सड़े अंडों की बौछार कर दी। नारे लगाने और सड़े अंडे फेंकने वाले ये सभी आम लोग थे।

तृणमूल के नेता आरोप लगा रहे हैं कि यह सब बीजेपी करवा रही है, लेकिन सवाल यह उठता है कि बीजेपी ज़्यादा से ज़्यादा किसी एक नेता के घर के सामने अपने कार्यकर्ताओं को इकट्ठा कर सकती है, जबकि इस तरह की तस्वीरें तो हर तरफ से सामने आ रही हैं। कल्याण बनर्जी एयरपोर्ट पहुंचेंगे, इसकी जानकारी पहले से किसी को नहीं थी, फिर भी वहां नारेबाजी हुई। आम लोगों को यह भी पता नहीं था कि सब्यसाची को पुलिस कब अस्पताल ले जाएगी या कब अदालत में पेश करेगी, फिर भी दोनों ही जगह नारे लगे और अंडे फेंके गए।

बंगाल को लेकर दो बातें बिल्कुल स्पष्ट हैं। न तो जनता ममता दीदी के साथ खड़ी है और न ही उनके अधिकांश विधायक और सांसद उनके साथ हैं। संगठन भी टूटता-बिखरता दिख रहा है। मूल बात यह है कि ममता के शासनकाल में बड़े पैमाने पर ज्यादतियां हुईं, लोगों पर अत्याचार हुए, उनकी पार्टी के नेताओं ने जमकर लूट मचाई और पार्टी के भीतर जो अच्छे लोग थे, वे बोलने से डरते थे। अब हालात पलट गए हैं और बगावत के सुर उठ रहे हैं। जो लोग आज भी खुलकर ममता का साथ दे रहे हैं, उनका अपना कोई जनाधार नहीं है।

कल्याण बनर्जी सबसे ज़्यादा मुखर हैं। उनके चुनाव क्षेत्र में 7 विधानसभा सीटें आती हैं, मगर यहां TMC सिर्फ 2 सीटें ही जीत सकी। महुआ मोइत्रा कृष्णानगर से सांसद हैं, जहां 7 विधानसभा सीटें हैं और इनमें से तृणमूल को सिर्फ 3 पर जीत मिली। कीर्ति आजाद के चुनाव क्षेत्र में भी 7 विधानसभा सीटें हैं, लेकिन TMC को इनमें से महज 1 सीट पर कामयाबी मिली। शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल से सांसद हैं, जहां विधानसभा की 7 सीटें हैं और इन सभी पर BJP ने जीत दर्ज की है। ये तथ्य और आंकड़े अपने आप पूरी कहानी बयां कर रहे हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!