'गॉडजिला' अल नीनो क्या है जिसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ाई? प्रशांत महासागर में बदलते मौसम का दुनिया पर क्या होगा असर विश्व एक घंटा पहले 2
एल नीनो प्रशांत महासागर से जुड़ी एक मौसमी घटना है, जो दुनियाभर के तापमान और मौसम के पैटर्न को प्रभावित करती है। कुछ जानकार 2026 में बेहद ताकतवर 'गॉडजिला' सुपर एल नीनो की आशंका जता रहे हैं, हालांकि कई वैज्ञानिक अभी पुख्ता भविष्यवाणी से बच रहे हैं।

पिछले कुछ महीनों से एल नीनो को लेकर दुनियाभर में जोरदार चर्चा छिड़ी हुई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2026 में बेहद ताकतवर सुपर एल नीनो सामने आ सकता है, जिसे 'गॉडजिला एल नीनो' का नाम भी दिया जा रहा है। हालांकि कई मौसम वैज्ञानिक फिलहाल इस पर साफ-साफ कुछ भी कहने से बच रहे हैं और सिर्फ सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

आखिर एल नीनो होता क्या है?

सरल शब्दों में कहें तो एल नीनो मौसम से जुड़ी एक ऐसी घटना है, जो तब घटित होती है जब प्रशांत महासागर में पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। भारत के संदर्भ में देखें तो मलेशिया और इंडोनेशिया की दिशा से आने वाली हवाओं की मात्रा काफी घट जाती है।

इसका नतीजा यह होता है कि पश्चिमी प्रशांत महासागर का गर्म पानी दोबारा मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की ओर लौटने लगता है। इसी कारण दुनिया के कई हिस्सों में तापमान चढ़ सकता है और मौसम के पैटर्न में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

100 साल में सिर्फ तीन बार आया सुपर एल नीनो

जानकारों के मुताबिक, जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तब उसे सुपर एल नीनो कहा जाता है। ऐसा बहुत कम मौकों पर ही होता है। बीते 100 साल के दौरान महज तीन बार ही सुपर एल नीनो दर्ज किया गया है, जिनमें 1982-83, 1997-98 और 2015-16 के साल शामिल हैं।

कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वक्त प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से तेज रफ्तार से गर्म हो रहा है और इसी वजह से हवाएं भी कमजोर पड़ती जा रही हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि साल के अंत तक एक मजबूत या सुपर एल नीनो आकार ले सकता है। हालांकि वे यह भी स्वीकार करते हैं कि इस बारे में अभी कोई भविष्यवाणी करना जल्दबाजी ही होगी।

आने वाले महीनों में दिख सकता है बड़ा असर

दूसरी तरफ, कुछ मौसम विशेषज्ञ लोगों को सनसनीखेज दावों से बचकर रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि अभी यह बता पाना मुश्किल है कि 2026-27 में असल में सुपर एल नीनो आएगा भी या नहीं। इसके लिए आने वाले महीनों के आंकड़ों का इंतजार करना जरूरी होगा।

कुल मिलाकर सुपर एल नीनो की आशंका को लेकर चर्चा भले ही गरम हो, लेकिन वैज्ञानिक अब तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में फिलहाल किसी भी बड़े दावे पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक मौसम एजेंसियों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार करना ही बेहतर रहेगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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