बिहार
एक दिन पहले
6
विचारों
संयुक्त पालन के फायदे
गांव या कस्बों में रहने वाले लोग जिनके पास थोड़ी सी खाली जमीन और जल स्रोत उपलब्ध है, वे हंस और बत्तख के संयुक्त पालन से शानदार मुनाफा कमा सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन दोनों पक्षियों की खान-पान की आदतें अलग-अलग होती हैं, इसलिए चारे के लिए इनके बीच प्रतिस्पर्धा नहीं होती। बत्तखें मुख्य रूप से पानी के कीड़े, मच्छरों के लार्वा और जलीय घास खाती हैं, जबकि हंस धान की पराली, सब्जियों के छिलके और घास का सेवन करते हैं। इससे चारे का खर्च काफी कम हो जाता है।
बायो अलार्म का काम
हंस केवल एक पक्षी ही नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रहरी भी है। यह काफी सतर्क स्वभाव का होता है और किसी भी अनजान व्यक्ति या जानवर के आने पर तेज आवाज निकालकर किसानों को सचेत कर देता है। इसीलिए इसे कई किसान बायो अलार्म के रूप में देखते हैं। हंस की उपस्थिति से बत्तखों की चोरी या जंगली जानवरों के हमले का डर भी कम हो जाता है।
सफल पालन के लिए 5 जरूरी टिप्स
- जगह का प्रबंधन: 20 बत्तख और 5 हंस पालने के लिए कम से कम 500 वर्ग फीट खुली जगह और 100 वर्ग फीट पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। तालाब न होने पर प्लास्टिक टैंक का उपयोग किया जा सकता है।
- शेड की व्यवस्था: रात में ठहरने के लिए एक सूखा और सुरक्षित शेड बनाएं। फर्श पर पुआल बिछाएं और हंस व बत्तख के लिए शेड में अलग-अलग कोने निर्धारित करें।
- संतुलित आहार: इन्हें गेहूं का दलिया, चावल की कणी और सरसों की खली खिलाएं। हफ्ते में दो बार अंडे के छिलके का चूरा या चूना पानी देना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।
- साफ-सफाई: बीमारियों से बचने के लिए सप्ताह में दो बार शेड की सफाई करें। पानी के बर्तनों और टैंकों को नियमित रूप से साफ करना बहुत जरूरी है।
- सतत आय: बत्तख करीब छह महीने में अंडे देना शुरू कर देती है, जिससे किसानों को जल्द कमाई होने लगती है, जबकि हंस के पंख, मांस और अंडे भविष्य में बड़े मुनाफे का स्रोत बनते हैं।
यह कम निवेश वाला व्यवसाय ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए आत्मनिर्भर बनने का एक बेहतरीन जरिया साबित हो सकता है।
Comments
0 comment