छत्तीसगढ़
11 घंटे पहले
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ट्रेन के जरिए हो रही थी तस्करी
छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने एनालॉग पनीर, जिसे सिंथेटिक या अमानक पनीर भी कहा जाता है, की बिक्री, भंडारण और परिवहन पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। सड़क मार्ग पर पुलिस और खाद्य विभाग की सख्त निगरानी के चलते तस्करों ने अब अपने तौर तरीके बदल लिए हैं और वे ट्रेन के सफर को सुरक्षित मानकर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी कड़ी में एक ताज़ा मामला रायपुर रेलवे स्टेशन से सामने आया है जहाँ खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 500 किलो संदिग्ध एनालॉग पनीर बरामद किया है।
अमरकंटक एक्सप्रेस से पहुंचे 10 डिब्बे
यह अवैध खेप भोपाल से चलकर अमरकंटक एक्सप्रेस के माध्यम से रायपुर पहुंची थी। तस्करों ने इसे 10 बड़े थर्माकोल डिब्बों में बहुत ही शातिर तरीके से पैक किया था ताकि किसी को शक न हो। जब ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर रुकी, तो खाद्य सुरक्षा विभाग को गुप्त सूचना के आधार पर मौके पर तैनात टीम ने तुरंत घेराबंदी कर ली। माल को जैसे ही उतारा गया, जांच के दौरान इसमें प्रतिबंधित एनालॉग पनीर पाया गया।
अधिकारियों के बीच घंटों तक चली खींचतान
इस छापेमारी के दौरान रेलवे स्टेशन पर प्रशासनिक अधिकारियों के बीच लगभग चार घंटे तक तीखी बहस और तनातनी देखने को मिली। रेलवे और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच जिम्मेदारी तय करने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला काफी देर तक अटका रहा। हालांकि अंततः खाद्य सुरक्षा विभाग ने पनीर के सैंपल लिए और उन्हें सील करके जांच के लिए प्रयोगशाला में भेज दिया। इसके बाद जब्त किए गए भारी माल को खराब होने से बचाने के लिए एक सुरक्षित फ्रीजर में रखने का इंतजाम किया गया। विभाग का कहना है कि प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल से संचालित है बड़ा नेटवर्क
जांच की दिशा में आगे बढ़ते हुए अधिकारियों ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है जिसका संचालन सीधे भोपाल से किया जा रहा था। प्रारंभिक पूछताछ और पड़ताल में यह सामने आया है कि इस धंधे के पीछे एक पूर्व सुपरवाइजर का हाथ है, जो पहले 'मिल्क मैजिक' कंपनी से जुड़ा हुआ था। अब वह 'शुद्ध अमृत पनीर' और 'बालाजी' जैसी लीज कंपनियों के नाम की आड़ में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों में नकली पनीर की सप्लाई का एक संगठित सिंडिकेट चला रहा है। इस तस्करी के जाल को बेहद व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया था, जिसमें ट्रेन से डिब्बे उतारने से लेकर स्थानीय बस स्टैंड तक इसे पहुँचाने और फिर आगे की सप्लाई के लिए अलग-अलग व्यक्तियों को जिम्मेदारी दी गई थी।
सरकार का सख्त रुख
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में पाम ऑयल और वेजीटेबल फैट से निर्मित एनालॉग पनीर पर एक साल का पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। आम जनता के स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती चिंता और इस तरह की मिलावटी सामग्री के खतरों को देखते हुए राज्य भर में अभियान चलाया जा रहा है। रायपुर के खाद्य विभाग के अधिकारी विनोद कुमार गुप्ता ने जानकारी दी है कि उन्हें ट्रेन के जरिए पनीर की अवैध आवक की सटीक खुफिया सूचना मिली थी। चूंकि मामला सीधे तौर पर जन स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द तैयार की जा रही है ताकि गिरोह के मुख्य सरगनाओं को कानून के दायरे में लाकर कड़ी सजा दिलाई जा सके।
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