सावन का पहला प्रदोष व्रत कब है, उज्जैन के ज्योतिषाचार्य से जानिए सही तारीख और शुभ मुहूर्त धर्म 2 घंटे पहले 4
सावन माह में भगवान शिव की कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत का बड़ा महत्व है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य से जानिए अगस्त महीने में पड़ने वाले इस पहले प्रदोष व्रत की सटीक तिथि और पूजा का शुभ समय।

सावन और प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। इस दौरान आने वाला प्रदोष व्रत भक्तों के लिए विशेष फलदायी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत सीधे तौर पर महादेव और माता पार्वती की उपासना को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि प्रदोष काल के दौरान पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता पाने के लिए यह व्रत अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। हालांकि हर महीने दो प्रदोष व्रत आते हैं, लेकिन सावन के महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

सावन का पहला प्रदोष व्रत: तिथि और मुहूर्त

अगस्त महीने में आने वाले पहले प्रदोष व्रत को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्सुकता है। उज्जैन के जाने-माने ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने इस व्रत की सही तिथि और मुहूर्त की जानकारी दी है। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 10 अगस्त को सुबह 8 बजे से हो रहा है। यह शुभ तिथि अगले दिन यानी 11 अगस्त को सुबह 04 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी। अतः सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त को ही रखा जाएगा। इसे सोम प्रदोष व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 9 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस व्रत के तुरंत बाद सावन मास की मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।

क्या है सोम प्रदोष व्रत का खास अर्थ?

जब त्रयोदशी की तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। सावन के महीने में सोमवार का दिन और उस पर त्रयोदशी का संयोग भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का सबसे श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में हो या अशुभ फल दे रहा हो, उनके लिए यह व्रत एक अचूक उपाय की तरह कार्य करता है। यह व्रत केवल मनोकामनाओं की पूर्ति ही नहीं करता, बल्कि मानसिक शांति, संतान सुख और घर में सुख-समृद्धि के लिए भी श्रद्धालु इसे पूर्ण निष्ठा के साथ रखते हैं।

पूजा और पालन के आवश्यक नियम

प्रदोष व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है:

  • व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्यदेव को जल अर्पित करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
  • अपने घर के पूजा स्थल को पूरी तरह स्वच्छ करें और भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें।
  • शिव परिवार का विधिवत पूजन करें। भगवान शिव को बेलपत्र, ताजे फूल, धूप और दीप अर्पित करें।
  • पूजन के दौरान प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करना अनिवार्य है।
  • अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ करें।
  • ध्यान रहे कि उपवास का पारण शाम को विधिवत पूजन करने के बाद ही किया जाना चाहिए।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप