पूर्वोत्तर भारत में कुदरत का कहर: अरुणाचल में सेना के जवान लापता, सिक्किम में भूस्खलन से 60 लोगों की जान पर बनी राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 2
पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में भारी मानसून ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां एक ओर बाढ़ में सैन्यकर्मी लापता हुए हैं, वहीं दूसरी ओर भूस्खलन ने दर्जनों परिवारों को बेघर होने के कगार पर ला खड़ा किया है।

पूर्वोत्तर में मानसून का रौद्र रूप

पूर्वोत्तर भारत में मानसून की सक्रियता ने अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में भारी तबाही मचा दी है। पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में तेजी आई है, जिससे स्थानीय निवासियों और सुरक्षा बलों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थितियां पैदा हो गई हैं। अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम इलाकों में जहां आपदा ने सेना के जवानों को प्रभावित किया है, वहीं सिक्किम में प्राकृतिक अस्थिरता के कारण कई परिवार सुरक्षित ठिकानों की तलाश में मजबूर हैं।

अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में सैन्य शिविर पर आपदा

अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी जिले में शुक्रवार की शाम को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अचानक आई बाढ़ ने सेना के दो अस्थायी आश्रय स्थलों को अपनी चपेट में ले लिया। भारी बारिश के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और जलप्रवाह इतना तीव्र था कि कैंप पूरी तरह बह गए। इस हृदयविदारक हादसे के वक्त वहां मौजूद सात सैन्यकर्मी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। प्रशासन द्वारा तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया, जिसमें से दो जवानों को सुरक्षित बचा लिया गया है। हालांकि, पांच जवान अभी भी लापता हैं, जिनकी गहन खोजबीन की जा रही है। संबंधित एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि लापता जवानों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

अपर सुबनसिरी में मलबे में दबे चार लोगों की मौत

अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले से भी दुखों का समाचार सामने आया है। केओजारिंग-बयाचिंग सड़क मार्ग पर निर्माण कार्य चल रहा था, तभी मूसलाधार बारिश के बीच अचानक भीषण भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से गिरे मलबे की चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान ताडू बाकी, ताजी राय, मार्कोश बसुमतारी और बाबुल अली के तौर पर की गई है। इस घटना ने सड़क निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में जमीन धंसने और मलबा गिरने की घटनाएं राहत कार्यों को भी अत्यंत कठिन बना देती हैं, जिससे बचाव दल के सामने भी कई अड़चनें आती हैं।

सिक्किम में संकट का पहाड़: 28 परिवारों पर मंडराया खतरा

अरुणाचल के बाद सिक्किम का पश्चिम हिस्सा भी बड़े भूस्खलन की चपेट में है। ग्यालशिंग जिले के युक्साम उप-मंडल के अंतर्गत 11-रिंबी तिंब्रोंग जीपीयू क्षेत्र में जमीन खिसकने की गंभीर घटनाएं दर्ज की गई हैं। रिंबी और सिंगलिटाम गांव के निवासियों के लिए स्थितियां भयावह बनी हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार, करीब 28 परिवारों के 60 लोगों पर अपने घरों को खोने का खतरा मंडरा रहा है। युक्साम के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट कार्यालय ने आधिकारिक निर्देश जारी करते हुए स्थानीय अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के आदेश दिए हैं।

लगातार 15 दिनों से मौत के साये में जी रहे लोग

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे बीते 15 दिनों से लगातार इस डर के बीच जी रहे हैं कि कब उनकी जमीन उनके पैरों के नीचे से खिसक जाए। रिंबी गांव में स्थिति सबसे अधिक नाजुक बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण रात के समय भी नींद नहीं आती और वे सतर्क रहने को मजबूर हैं। सिंगलिटाम गांव, जो रिंबी के मुकाबले अधिक ऊंचाई पर स्थित है, वहां भी कमोबेश यही स्थिति है। प्रशासन के अनुसार, वहां दो से तीन घर पहले ही भूस्खलन की जद में आ चुके हैं। जमीन के धंसने का सिलसिला अभी थमा नहीं है, जो प्रशासन की चिंता का मुख्य विषय बना हुआ है।

प्रशासन का राहत और निगरानी मिशन

आपदा की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कमर कस ली है। युक्साम के एसडीएम और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) संयुक्त रूप से शनिवार को प्रभावित इलाकों का प्रारंभिक निरीक्षण करेंगे। इसके बाद रविवार को जिला कलेक्टर और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम मौके का दौरा करेगी। इस मिशन का प्राथमिक लक्ष्य उन सभी परिवारों की पहचान करना है जिनके घर भूस्खलन के प्रति संवेदनशील हैं। इन परिवारों को अस्थायी राहत शिविरों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है। सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में मानसून के दौरान सड़क संपर्क बनाए रखना और जरूरी सेवाओं को बहाल रखना एक निरंतर चुनौती बनी रहती है, जिसे प्रशासन प्राथमिकता के आधार पर हल करने की कोशिश कर रहा है।

पूर्वोत्तर की चुनौती

अरुणाचल प्रदेश के लापता जवान और सिक्किम के बेघर होते परिवार पूर्वोत्तर में मानसून की विनाशकारी प्रकृति को दर्शाते हैं। एक तरफ जहां बचाव दल अरुणाचल के जंगलों और नदियों में लापता सैन्यकर्मियों को तलाश रहे हैं, दूसरी तरफ सिक्किम का प्रशासन विस्थापन और पुनर्वास की तैयारी में जुटा है। पहाड़ी रास्तों पर मलबे का ढेर और नदियों का उग्र रूप आने वाले दिनों में और भी मुश्किलें बढ़ा सकता है। स्थानीय अधिकारियों ने सभी निवासियों से संवेदनशील क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने और सरकारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करने की अपील की है। आने वाले समय में मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप