रेलवे स्टेशनों से गायब हो चुकीं ये 5 चीजें, क्या आपको आज भी याद हैं? व्यापार एक महीने पहले 18
कभी रेलवे स्टेशनों की पहचान रहीं पीसीओ बूथ, सिक्के वाली वजन मशीन, कागजी रिजर्वेशन चार्ट, एनालॉग घड़ियां और टेलीग्राम काउंटर जैसी पांच चीजें नई तकनीक के दौर में अब लगभग गायब हो चुकी हैं।

रेलवे स्टेशन कभी कुछ ऐसी चीजों के लिए जाने जाते थे, जो वहां पहुंचते ही नजर आ जाती थीं और स्टेशनों की अलग ही पहचान बनाती थीं। समय के साथ नई तकनीक आती गई और इनमें से कई पुरानी चीजें धीरे-धीरे चलन से बाहर हो गईं। आइए जानते हैं ऐसी ही पांच चीजों के बारे में, जो अब लगभग गायब हो चुकी हैं।

पीसीओ बूथ

एक दौर में रेलवे स्टेशनों पर लगे पीसीओ बूथ यात्रियों की सबसे बड़ी जरूरत हुआ करते थे। ट्रेन छूटने, पहुंचने या किसी जरूरी सूचना के लिए लोग लंबी कतारों में खड़े होकर फोन करते थे। मोबाइल फोन के आने के बाद इन बूथों की जरूरत लगभग खत्म हो गई और अब ये स्टेशन परिसर से पूरी तरह गायब हो चुके हैं।

सिक्का डालकर वजन मापने वाली मशीन

स्टेशनों पर सिक्का डालकर वजन बताने वाली मशीनें यात्रियों के आकर्षण का केंद्र हुआ करती थीं। इन मशीनों से वजन के साथ-साथ भाग्य या कोई संदेश लिखा टिकट भी निकलता था। डिजिटल दौर में इनकी संख्या लगातार घटती चली गई। कुछ स्टेशनों पर ये मशीनें आज भी दिख जाती हैं, लेकिन पहले जैसी लोकप्रियता अब नहीं रही।

कागजी रिजर्वेशन चार्ट

डिजिटल व्यवस्था से पहले ट्रेनों के रिजर्वेशन चार्ट कार्बन कॉपी और कागज पर तैयार किए जाते थे। प्लेटफॉर्म और कोच के बाहर चिपकाए गए इन चार्टों में यात्री अपना नाम और सीट नंबर तलाशते थे। अब लोग मोबाइल ऐप पर ही अपनी सीट कन्फर्म कर लेते हैं, जिसके चलते इन चार्टों की जरूरत भी खत्म हो गई है।

बड़ी गोल एनालॉग घड़ियां

रेलवे स्टेशनों पर लगी बड़ी गोल एनालॉग घड़ियां कभी यात्रियों के लिए समय जानने का सबसे भरोसेमंद साधन थीं। प्लेटफॉर्म पर नजर पड़ते ही लोग ट्रेन का समय इनसे मिला लेते थे। अब इनकी जगह डिजिटल डिस्प्ले और इलेक्ट्रॉनिक घड़ियों ने ले ली है, जिससे पुरानी घड़ियां धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं।

टेलीग्राम बुकिंग काउंटर

कभी रेलवे स्टेशनों पर मौजूद टेलीग्राम बुकिंग काउंटर दूर-दराज तक जरूरी संदेश पहुंचाने का तेज माध्यम हुआ करते थे। बीमारी या अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं टेलीग्राम के जरिए भेजी जाती थीं। वर्ष 2013 में टेलीग्राम सेवा बंद होने के साथ ही रेलवे स्टेशनों से ये काउंटर भी इतिहास का हिस्सा बन गए।

हाथ वाले सिग्नल लैंप

आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम आने से पहले रेलवे कर्मचारी रात के समय हाथ में लाल, हरे और पीले रंग के लैंप लेकर ट्रेनों को संकेत देते थे। इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल, इंटरलॉकिंग और स्वचालित तकनीक बढ़ने के साथ ही हाथ वाले ये सिग्नल लैंप अब बहुत कम देखने को मिलते हैं।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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