लाल किले पर बैठने की जगह का विवाद, राहुल गांधी और खरगे के नहीं पहुंचने पर सरकार ने दिखाया पुराना प्रोटोकॉल राष्ट्रीय राजनीति 3 घंटे पहले 3
स्वतंत्रता दिवस समारोह में बैठने की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच नया सियासी टकराव छिड़ गया है, जहां रक्षा मंत्रालय ने यूपीए शासनकाल के उदाहरण देकर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।

लाल किले पर सियासी घमासान

स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर लाल किले की प्राचीर से एक बार फिर सियासी खींचतान देखने को मिली है। लगातार तीसरे वर्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस राष्ट्रीय आयोजन से अपनी दूरी बनाए रखी है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम में शामिल न होने के पीछे बैठने की व्यवस्था यानी सीटिंग अरेंजमेंट को मुख्य कारण बताया जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष के नेताओं को पीछे की कतारों में जगह देना उनका अपमान है, जबकि केंद्र सरकार ने इन दावों को पूरी तरह से नकार दिया है।

विवाद की जड़ और कांग्रेस का पक्ष

विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस नेताओं ने यह मुद्दा उठाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को उनकी गरिमा के अनुरूप स्थान नहीं दिया गया। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि प्रोटोकॉल के मुताबिक राहुल गांधी, जिन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है, उन्हें पहली पंक्ति में स्थान मिलना चाहिए था। लेकिन उन्हें दूसरी या उसके पीछे की पंक्तियों में जगह दी गई, जिसे पार्टी ने सीधे तौर पर लोकतंत्र और जनता का अपमान करार दिया है। मल्लिकार्जुन खरगे के संदर्भ में भी यही तर्क दिया गया कि उन्हें उचित स्थान नहीं दिया गया, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ गई।

रक्षा मंत्रालय का कड़ा जवाब

मामले को तूल पकड़ते देख रक्षा मंत्रालय ने तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दी और कांग्रेस के दावों को बेबुनियाद साबित करने के लिए पुराने रिकॉर्ड खंगाले। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कांग्रेस नेताओं को यूपीए शासनकाल की एक सूची दिखाई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उस समय विपक्ष के बड़े नेताओं को कहां बिठाया जाता था। मंत्रालय ने उदाहरण के तौर पर स्पष्ट किया कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब सुषमा स्वराज और अरुण जेटली जैसे दिग्गज बीजेपी नेताओं को भी पीछे की कतारों में ही जगह दी जाती थी। इस जवाब ने कांग्रेस के नैरेटिव पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

सरकार का क्या है तर्क?

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम में बैठने की व्यवस्था पूरी तरह से प्रोटोकॉल के दायरे में की गई थी। सरकार का यह भी कहना है कि इस बार पेरिस ओलंपिक से वापस लौटे भारतीय खिलाड़ियों को विशेष सम्मान देने के लिए उन्हें अगली पंक्तियों में बिठाने की व्यवस्था की गई थी, जिसके कारण बैठने के क्रम में कुछ बदलाव हुए थे। रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि प्रोटोकॉल में कोई भी फेरबदल राजनीतिक मंशा से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव के विशेष अतिथियों के सम्मान में किया गया था।

खरगे के कार्यक्रम में नहीं आने का कारण

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संदर्भ में कांग्रेस की ओर से यह तर्क दिया गया कि उन्हें दी गई सीट तक पहुंचना उनके लिए कठिन था क्योंकि वहां तक काफी पैदल चलना पड़ता। पार्टी का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते यह उनके लिए संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने लाल किले के बजाय अपने पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन में तिरंगा फहराने का निर्णय लिया। इस अवसर पर उनके साथ राहुल गांधी और सोनिया गांधी भी मौजूद थे। हालांकि, बीजेपी ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

बीजेपी का तीखा हमला

भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पर जोरदार निशाना साधा है। बीजेपी नेताओं ने इसे राष्ट्रीय पर्व का अपमान बताते हुए कड़ी निंदा की है। बीजेपी नेता आरपी सिंह ने मल्लिकार्जुन खरगे के पैदल चलने संबंधी बहाने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे संसद के मकर द्वार पर तो रोजाना सीढ़ियां चढ़ते हैं, फिर लाल किले पर उन्हें चलने में क्या परेशानी हो सकती है? बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस अपनी राजनीति चमकाने के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रमों का राजनीतिकरण कर रही है और बेवजह के विवाद खड़े कर रही है।

निष्कर्ष

स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील मौके पर हुई यह तकरार राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां एक ओर कांग्रेस इसे विपक्षी नेताओं के सम्मान से जोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार इसे प्रोटोकॉल और ऐतिहासिक उदाहरणों के आधार पर उचित ठहरा रही है। कुल मिलाकर, इस मुद्दे ने एक बार फिर पक्ष और विपक्ष के बीच की दूरी को स्पष्ट कर दिया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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