राहत इंदौरी के मशहूर शेर: 'हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे...' पढ़िए वे नज़्में जो आज भी दिलों में जिंदा हैं जीवनशैली एक घंटा पहले 3
उर्दू अदब के मशहूर शायर राहत इंदौरी अपनी बेबाक और बुलंद आवाज़ के लिए जाने जाते रहे। यहां पढ़िए उनके वे चुनिंदा शेर जो हर पीढ़ी की ज़ुबान पर आज भी मौजूद हैं।

राहत इंदौरी उर्दू शायरी और मुशायरों की दुनिया के उस रोशन सितारे का नाम है, जिन्होंने अदब को सिर्फ़ मंच तक नहीं रहने दिया, बल्कि उसे आम आदमी की आवाज़ बना दिया। उनकी रचनाओं में जो बेबाकी, तेवर और रूमानियत झलकती थी, उसने हर उम्र के पाठक और श्रोता को अपनी ओर खींचा। जिस अनोखे अंदाज़, बुलंद आवाज़ और सलीके से वे मंच पर अपने शेर सुनाते थे, वह अपने आप में बेमिसाल था।

सामाजिक सरोकारों, सियासत और समाज की विसंगतियों पर वे सीधा और तीखा वार करने से कभी नहीं हिचके। यही वजह है कि उनकी शायरी आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है। इसी कड़ी में पेश हैं राहत इंदौरी साहब के कुछ मशहूर शेर।

राहत इंदौरी के चुनिंदा मशहूर शेर

1. सोए रहते हैं ओढ़ कर ख़ुद को
अब ज़रूरत नहीं रज़ाई की

2. अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है
उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते

3. मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूं
यहां हमदर्द हैं दो-चार मेरे

4. तुझ से मिलने की तमन्ना भी बहुत है लेकिन
आने जाने में किराया भी बहुत लगता है

5. अब इतनी सारी शबों का हिसाब कौन रखे
बड़े सवाब कमाए गए जवानी में

6. आते जाते पल ये कहते हैं हमारे कान में
कूच का ऐलान होने को है तय्यारी रखो

7. जा-नमाज़ों की तरह नूर में उज्लाई सहर
रात भर जैसे फ़रिश्तों ने इबादत की है

8. हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

9. रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चांद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है

10. वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा
मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया

11. बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूं पिला देनी चाहिए

12. सूरज सितारे चांद मिरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मिरे हाथ में रहे

13. बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं

14. घर के बाहर ढूंढता रहता हूं दुनिया
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है

15. चराग़ों का घराना चल रहा है
हवा से दोस्ताना चल रहा है

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!