पूर्णिया का अनोखा मंदिर: तालाब में स्नान और पूजा से भर जाती है सूनी गोद, जानिए क्या है मान्यता धर्म एक दिन पहले 12
बिहार के पूर्णिया में स्थित प्राचीन पूरण देवी मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ संतान प्राप्ति के लिए निसंतान दंपत्ति विशेष अनुष्ठान करते हैं।

पूर्णिया का आस्था का केंद्र: पूरण देवी मंदिर

भारत में आस्था और विश्वास का अटूट रिश्ता है। जब विज्ञान और चिकित्सा के तमाम प्रयास भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते, तो लोग ईश्वर की शरण में जाते हैं। इसी तरह की एक गहरी धार्मिक आस्था बिहार के पूर्णिया शहर में स्थित प्रसिद्ध पूरण देवी मंदिर से जुड़ी है। संतान सुख की कामना रखने वाले दंपत्ति केवल आधुनिक चिकित्सा पर ही निर्भर नहीं रहते, बल्कि इस प्राचीन मंदिर की दैवीय शक्तियों पर भी अटूट विश्वास रखते हैं। स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर और इसके परिसर में स्थित एक प्राचीन तालाब को लेकर सदियों से विशेष मान्यताएं प्रचलित हैं।

तालाब और मंदिर का पौराणिक महत्व

पूर्णिया स्थित पूरण देवी मंदिर न केवल क्षेत्र का सबसे प्राचीन धार्मिक स्थल है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र भी माना जाता है। मंदिर परिसर में बना हुआ तालाब भी उतना ही प्राचीन है जितना कि स्वयं मंदिर। इस तालाब के बारे में स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह स्थान केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि भक्तों की मुरादें पूरी करने वाला एक पवित्र स्थान है। मंदिर के पुजारी मनोज मिश्र के अनुसार, इस तालाब का अपना एक पौराणिक इतिहास है। माना जाता है कि माता महादेवी मंदिर में प्रवेश करने या दर्शन करने से पूर्व इसी तालाब के पवित्र जल में स्नान किया करती थीं। यही कारण है कि आज भी इस स्थान को अत्यधिक पावन माना जाता है और भक्त यहां पूरी श्रद्धा के साथ आते हैं।

निसंतान दंपत्तियों के लिए विशेष अनुष्ठान

मंदिर के पुजारी पंडित मनोज कुमार मिश्र ने बताया कि निसंतान दंपत्तियों के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता है। उनकी मान्यता है कि जो दंपत्ति पूरी आस्था और विधि-विधान के साथ इस मंदिर परिसर में आते हैं, मां पूरण देवी उनकी खाली गोद जरूर भरती हैं। इस अनुष्ठान को लेकर एक विशेष प्रक्रिया बताई गई है, जिसका पालन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। पुजारी के मुताबिक, संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले जोड़े को ब्रह्म मुहूर्त में इस तालाब में स्नान करना होता है। स्नान के बाद दंपत्ति को अपने पुराने कपड़े तालाब के किनारे ही त्याग देने होते हैं और नए वस्त्र धारण करके माता पूरण देवी के समक्ष अपनी प्रार्थना रखनी होती है।

क्या कहते हैं मंदिर के पुजारी

पंडित मनोज कुमार मिश्र का कहना है कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और कई श्रद्धालुओं ने यहां प्रार्थना कर अपनी मनोकामना पूरी होने का दावा भी किया है। उनके अनुसार, यदि दंपत्ति पूरे मन से और सच्ची आस्था के साथ ब्रह्म मुहूर्त में यह कार्य करते हैं, तो माता रानी की कृपा से एक साल के भीतर उनकी गोद भर जाती है। यह स्थान आज भी उन लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण बना हुआ है जो संतान सुख से वंचित हैं। पूर्णिया के इस मंदिर में न केवल स्थानीय लोग बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु अपनी मुरादें लेकर पहुँचते हैं।

धार्मिक आस्था का आधार

आज के आधुनिक युग में भी जब चिकित्सा विज्ञान ने काफी प्रगति कर ली है, धार्मिक स्थलों पर लोगों का विश्वास कम नहीं हुआ है। डॉक्टर और आधुनिक उपचार के साथ-साथ लोग आध्यात्मिक शांति और ईश्वरीय कृपा के लिए ऐसे मंदिरों की ओर रुख करते हैं। पूरण देवी मंदिर की मान्यता भी इसी अटूट विश्वास का प्रतीक है। चाहे विज्ञान हो या आस्था, दोनों ही अपने-अपने तरीके से मानव जीवन में खुशियां लाने का प्रयास करते हैं और पूर्णिया का यह मंदिर इसी विश्वास का जीता-जागता उदाहरण बना हुआ है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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