बिहार
एक घंटा पहले
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बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर
बिहार के जहानाबाद जिले में सूखे की स्थिति से जूझ रहे किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। लंबे समय से बारिश की कमी के कारण फसलें प्रभावित हो रही थीं, लेकिन अब प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से किसानों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। सरकार द्वारा इस योजना के अंतर्गत पटवन यानी सिंचाई के खर्च को कम करने के लिए 45 से 55 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ना है, ताकि न केवल पानी की बचत हो, बल्कि खेती की लागत में भी भारी कटौती की जा सके।
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया हुई शुरू
कृषि विभाग की ओर से इस योजना के लिए पोर्टल को सक्रिय कर दिया गया है। इच्छुक किसान अब ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इस साल जिले में बड़ी संख्या में मिनी स्प्रिंकलर और पोर्टेबल स्प्रिंकलर प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, विभागीय स्तर पर आवेदन प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। जो किसान अपने खेतों में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनाना चाहते हैं, उन्हें निजी नलकूप के लिए भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। उदाहरण के तौर पर, 160 फीट गहरी बोरिंग कराने पर कुल 79,480 रुपए का खर्च आता है, जिस पर सरकार अधिकतम 25,000 रुपए का अनुदान देगी। इसके अलावा, 3 एचपी क्षमता वाले मोटर की खरीद पर 15,000 रुपए तक की सब्सिडी का प्रावधान है।
स्प्रिंकलर और ड्रिप तकनीक के फायदे
उद्यान विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि स्प्रिंकलर यानी फव्वारा सिंचाई तकनीक पानी की बर्बादी रोकने में बेहद कारगर है। सामान्य तरीके से खेतों की सिंचाई करने पर पानी का बड़ा हिस्सा बेकार हो जाता है, जबकि इस तकनीक से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है। इससे न केवल पानी की खपत कम होती है, बल्कि खेत में खरपतवार की समस्या भी न्यूनतम हो जाती है। साथ ही, तरल खाद देने में भी यह प्रणाली अत्यधिक लाभदायक सिद्ध होती है, जिससे फसलों की पैदावार में गुणात्मक सुधार होता है।
लागत और अनुदान का गणित
इस योजना का लाभ लेने के लिए ड्रिप सिंचाई हेतु न्यूनतम आधा एकड़ और स्प्रिंकलर सिस्टम के लिए एक एकड़ भूमि का होना अनिवार्य है। खर्च और सब्सिडी का विवरण कुछ इस प्रकार है:
- एक हेक्टेयर में ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित करने पर लगभग 1,68,736 रुपए का खर्च आता है।
- मिनी स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर कुल 1,26,000 रुपए का खर्च निर्धारित है।
- पोर्टेबल सिंचाई तकनीक अपनाने पर कुल 29,214 रुपए का खर्च आता है।
सब्सिडी की राशि का भुगतान स्थलीय निरीक्षण और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किया जाता है। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, जहानाबाद जिले में इस वर्ष औसत से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है, जिसके चलते यह योजना किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार की इस पहल से किसानों के आर्थिक बोझ में कमी आएगी और वे सूखे के कठिन दौर में भी अपनी खेती को सुरक्षित रख सकेंगे।
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