बिहार में वर्दी की मिसाल: SSP पर ही महिला कांस्टेबल ने तान दिया हथियार, ड्यूटी के प्रति सतर्कता की हो रही है तारीफ बिहार 2 घंटे पहले 3
भागलपुर में देर रात कोतवाली थाने के निरीक्षण पर निकले एसएसपी को ड्यूटी पर तैनात महिला संतरी ने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए रोक दिया। अपनी पहचान साबित करने के बाद ही उन्हें प्रवेश मिला, जिसके बाद पुलिस विभाग में महिला कांस्टेबल की जमकर सराहना हो रही है।

भागलपुर में सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्त पालन

बिहार के भागलपुर जिले से अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की एक ऐसी घटना सामने आई है जो हर तरफ चर्चा का विषय बनी हुई है। भागलपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार जब देर रात औचक निरीक्षण के लिए कोतवाली थाना पहुंचे, तो वहां तैनात एक महिला कांस्टेबल ने सुरक्षा के कड़े नियमों का पालन करते हुए एसएसपी को ही रोक दिया। यह वाकया उस समय हुआ जब आला अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने निकले थे, लेकिन संतरी की मुस्तैदी ने उन्हें भी अपनी जगह पर खड़ा होने के लिए मजबूर कर दिया।

हथियार तानकर एसएसपी को किया सतर्क

घटना रविवार की देर रात की है। एसएसपी प्रमोद कुमार जिले की पुलिस व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से अलग अलग थानों का दौरा कर रहे थे। करीब रात 10 बजे जब वे कोतवाली थाना परिसर के मुख्य द्वार पर पहुंचे, तो वहां ड्यूटी पर महिला कांस्टेबल नेहा कुमारी तैनात थीं। जैसे ही एसएसपी अंदर दाखिल होने लगे, नेहा कुमारी ने सुरक्षा नियमों के तहत पूरी सतर्कता बरती। उन्होंने बिना किसी देरी के अपना हथियार तान दिया और आने वाले व्यक्ति को रुकने का सख्त निर्देश दिया।

इस अचानक हुई कार्रवाई से कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण जरूर हुआ, लेकिन एसएसपी ने अपना आपा नहीं खोया। उन्होंने न केवल संतरी के निर्देश का पालन किया, बल्कि शांत रहते हुए अपनी पहचान उजागर की और निर्धारित सुरक्षा कोड भी साझा किया। यह स्पष्ट था कि कांस्टेबल का उद्देश्य केवल अपनी ड्यूटी पूरी करना और थाने की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

पहचान की पुष्टि के बाद बदला रुख

जब महिला कांस्टेबल नेहा कुमारी को यह सुनिश्चित हो गया कि सामने खड़े व्यक्ति वास्तव में भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार ही हैं, तो उन्होंने तुरंत अपना हथियार नीचे कर लिया। प्रोटोकॉल का सम्मान करते हुए उन्होंने एसएसपी को सेल्यूट किया और उन्हें थाना परिसर के भीतर जाने की अनुमति प्रदान की। यह पूरी घटना पुलिस विभाग में मौजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल के प्रति समर्पण का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।

ड्यूटी के प्रति सजगता की मिसाल

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रात के समय थाना परिसर की सुरक्षा को लेकर संतरी को बेहद चौकन्ना रहने के स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं। नियम यह है कि निर्धारित समय बीत जाने के बाद यदि कोई भी व्यक्ति परिसर में प्रवेश करने का प्रयास करता है, तो सुरक्षाकर्मी को उसकी पहचान का सत्यापन करना अनिवार्य होता है। यदि स्थिति संदिग्ध लगे या व्यक्ति की पहचान स्पष्ट न हो, तो सुरक्षा के लिहाज से हथियार तानकर उसे रोकना एक उचित और आवश्यक प्रक्रिया है।

इस घटना की सबसे खास बात यह रही कि कांस्टेबल नेहा कुमारी ने पद के दबाव में आए बिना अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई। उन्होंने यह साबित कर दिया कि वर्दी का सम्मान और ड्यूटी के नियम किसी के लिए भी एक समान हैं, चाहे वह कोई आम नागरिक हो या स्वयं वरिष्ठ पुलिस अधिकारी। वर्तमान में पुलिसिंग के क्षेत्र में इस तरह की सतर्कता को बेहद सकारात्मक माना जा रहा है और नेहा कुमारी की इस सजगता की पूरे जिले में सराहना की जा रही है। यह मामला अन्य पुलिसकर्मियों के लिए भी एक प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है कि कैसे हर परिस्थिति में प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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