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5 घंटे पहले
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अमेरिका में भारतीय उद्योग का परचम
भारतीय व्यापारिक समूह एस्सार ग्रुप ने संयुक्त राज्य अमेरिका में अपनी उपस्थिति को एक नए स्तर पर ले जाते हुए एक विशाल स्टील प्लांट स्थापित करने की घोषणा की है। यह परियोजना न केवल निवेश के लिहाज से ऐतिहासिक है, बल्कि रोजगार के अवसर पैदा करने के मामले में भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस परियोजना पर कुल 18 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा, जो भारतीय रुपये में लगभग ₹172776 करोड़ के बराबर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस निवेश का स्वागत करते हुए इसे अमेरिकी इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा स्टील संयंत्र करार दिया है।
परियोजना की रूपरेखा और क्षमता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एस्सार ग्रुप की अमेरिकी सहायक कंपनी मेसाबी मेटालिक्स द्वारा इस विशाल प्लांट का निर्माण अमेरिका के आयोवा राज्य में किया जाएगा। यह संयंत्र अपनी उत्पादन क्षमता के मामले में दुनिया के प्रमुख स्टील केंद्रों में गिना जाएगा। इसकी सालाना स्टील उत्पादन क्षमता लगभग 1 करोड़ टन रहने का अनुमान है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से इस परियोजना की आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि इससे रोजगार की एक बड़ी श्रृंखला खुलेगी।
रोजगार के हजारों अवसर
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस प्लांट के आने से अमेरिका में नौकरियों की बहार आएगी। आंकड़ों के अनुसार:
- परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान करीब 6,000 लोगों को रोजगार मिलेगा।
- प्लांट शुरू होने और वहां होने वाली खनन गतिविधियों से लगभग 2,000 स्थायी नौकरियां पैदा होंगी।
इस प्रकार, यह प्रोजेक्ट प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों की आजीविका का आधार बनेगा।
आपूर्ति श्रृंखला और घर वापसी की भावना
मेसाबी मेटालिक्स के कार्यकारी बोर्ड के चेयरमैन रेवंत रुइया ने इस निवेश को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है। उनके अनुसार, यह निवेश एस्सार ग्रुप के लिए किसी 'घर वापसी' से कम नहीं है। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल यानी लौह अयस्क, अमेरिका के मिनेसोटा में विकसित की जा रही एक नई खदान से प्राप्त होगा। इस तरह माइनिंग से लेकर स्टील के अंतिम निर्माण तक की पूरी चेन अमेरिका में ही मौजूद रहेगी। रेवंत रुइया ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका परिवार मिनेसोटा की इस खदान में करीब 3 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश करेगा। डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, यह पिछले 50 वर्षों में अमेरिका में विकसित होने वाली पहली नई लौह अयस्क खदान होगी। हालांकि, इस पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर पूरी तरह विकसित होने में करीब एक दशक का समय लगने की संभावना है।
व्यापार नीतियों और शुल्क का प्रभाव
इस बड़े निवेश को अमेरिकी व्यापार नीतियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने आयातित स्टील पर 50 प्रतिशत तक का भारी शुल्क यानी टैरिफ लगा रखा है। अमेरिका के कॉमर्स मिनिस्टर हॉवर्ड लुटनिक का मानना है कि यदि यह टैरिफ नहीं होता, तो शायद यह खदान और स्टील प्लांट का निर्माण संभव नहीं हो पाता। ट्रंप ने भी संकेत दिया कि कई कंपनियां अब अमेरिका में ही उत्पादन करने पर जोर दे रही हैं क्योंकि वे भारी आयात शुल्क से बचना चाहती हैं। इस खदान के लिए फाइनेंसिंग में अमेरिका के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ने भी सहयोग प्रदान किया है।
एस्सार ग्रुप का वैश्विक अनुभव
एस्सार ग्रुप का इतिहास देखें तो शशि रुइया और रवि रुइया द्वारा स्थापित इस समूह की जड़ें अमेरिका में काफी पुरानी हैं। साल 2007 में मिनेसोटा स्टील और उसके लौह अयस्क संसाधनों के अधिग्रहण के साथ ही कंपनी ने वहां अपना विस्तार शुरू कर दिया था। भारत में भी समूह का मजबूत आधार है, जहां वे गुजरात के हजीरा में 1 करोड़ टन क्षमता का स्टील प्लांट चला रहे हैं। इसके अलावा, समूह की अंतरराष्ट्रीय पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटेन में उनकी स्टैनलो रिफाइनरी काम कर रही है और सऊदी अरब में वे कम-कार्बन स्टील प्रोजेक्ट को लेकर भी योजनाएं बना रहे हैं।
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