चीन के दाओचेंग में हिली धरती, रिक्टर पैमाने पर 4.5 की तीव्रता से आया भूकंप विश्व 2 घंटे पहले 3
चीन के दाओचेंग शहर से 78 किलोमीटर उत्तर में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.5 दर्ज की गई है।

चीन के दाओचेंग इलाके में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के आंकड़ों के आधार पर समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि भूकंप का केंद्र दाओचेंग से लगभग 78 किलोमीटर उत्तर की दिशा में था। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.5 दर्ज की गई है। गनीमत यह रही कि इस घटना में अब तक किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है। आमतौर पर 4.5 की तीव्रता वाले भूकंप को बहुत अधिक विनाशकारी नहीं माना जाता है, लेकिन इसके झटके साफ तौर पर महसूस किए जा सकते हैं।

सिचुआन प्रांत में एक महीने पहले मची थी खलबली

दाओचेंग में आए इस भूकंप से पहले, पिछले महीने 28 अगस्त को भी चीन के सिचुआन प्रांत में तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस समय रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई थी। भूकंप का केंद्र सिचुआन प्रांत के लॉन्गचांग शहर में जमीन के नीचे था। सिचुआन में जब यह भूकंप आया था, तब लोग डर के मारे अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए थे। इस इलाके के लोग भूकंपीय गतिविधियों के कारण अक्सर बेहद सतर्क रहते हैं और धरती में थोड़ी भी हलचल महसूस होने पर तुरंत खुले मैदानों की तरफ भागते हैं। हालांकि, उस 5.0 तीव्रता वाले भूकंप से भी किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली थी, लेकिन इमारतों में कंपन और कुछ जगहों पर हल्की दरारें जरूर देखी गई थीं।

तुर्की में भी महसूस किए गए थे भूकंप के तेज झटके

हाल ही में तुर्की के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में भी धरती कांपने की घटना सामने आई थी। वहां आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.1 मापी गई थी। यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंपीय केंद्र (ईएमएससी) के अनुसार, तुर्की में आए इस भूकंप का केंद्र सतह से केवल 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। कम गहराई पर होने के कारण इसके झटके काफी तेज महसूस किए गए थे।

समझें क्यों कांपती है धरती?

भूकंप आने के पीछे कई तरह के वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण जिम्मेदार होते हैं। हमारी पृथ्वी के अंदर कई टेक्टोनिक प्लेट्स मौजूद हैं जो लगातार बेहद धीमी गति से घूमती रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने की कोशिश करती हैं, तो इनके घर्षण से भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। इसी ऊर्जा के कारण धरती हिलने लगती है जिसे हम भूकंप कहते हैं।

प्राकृतिक कारणों के अलावा कई बार मानवीय गतिविधियों को भी इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है। मानव द्वारा प्रकृति के अत्यधिक दोहन, जैसे कि बड़े बांधों का निर्माण, खदानों में विस्फोट और पहाड़ों को नुकसान पहुंचाने से भी जमीन के अंदर की प्लेटों का संतुलन बिगड़ जाता है, जो भूकंप के झटके के रूप में सामने आता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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