सिर्फ 45 दिन में बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं संजीत के मुर्गे, बेहतरीन गुणवत्ता से सीधी बिक्री और लाखों की कमाई बिहार एक महीने पहले 53
शिवहर के प्रगतिशील किसान संजीत कुमार आधुनिक पोल्ट्री फार्मिंग से हर लॉट में 5.5 से 6.8 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। उनके मुर्गे 45 दिन में तैयार हो जाते हैं और गुणवत्ता ऐसी कि व्यापारी खुद फार्म पहुंचकर खरीदारी करते हैं।

शिवहर जिले के प्रगतिशील किसान संजीत कुमार पिछले पांच वर्षों से पोल्ट्री फार्मिंग के क्षेत्र में जुटे हुए हैं। अपनी मेहनत और कुशल प्रबंधन के दम पर उन्होंने इस व्यवसाय में अलग पहचान बना ली है। संजीत का मानना है कि अगर सही देखरेख और समय पर आहार-पानी की व्यवस्था की जाए, तो पोल्ट्री फार्मिंग में बहुत कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। उनके फार्म पर आधुनिक तकनीक और साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है, जिससे चूजों की मृत्यु दर बेहद कम रहती है और उनकी बढ़त तेजी से होती है।

महज 45 दिन में तैयार हो जाती है खेप

इस फार्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां चूजे केवल 45 दिनों के भीतर पूरी तरह बिक्री के लायक हो जाते हैं। फिलहाल संजीत कुमार के फार्म में 10 दिन के करीब 1500 चूजे मौजूद हैं, जिनकी दिन-रात निगरानी की जा रही है। संजीत बताते हैं कि 45 दिन का चक्र पूरा होते-होते एक मुर्गे का वजन औसतन 2.5 से 3 किलोग्राम तक आसानी से पहुंच जाता है। कम समय में बेहतर वजन हासिल कर लेना ही इस कारोबार की असली कामयाबी है, जिसकी वजह से साल भर में कई लॉट तैयार किए जा सकते हैं।

लाखों की कमाई का पूरा हिसाब

हालांकि अभी फार्म में 1500 चूजे हैं, लेकिन आमतौर पर हर लॉट में वे 2000 से 2500 मुर्गों का बड़े स्तर पर पालन करते हैं। बाजार में मुर्गों की बिक्री क्विंटल के हिसाब से थोक भाव में होती है। मौजूदा समय में मुर्गों का बाजार भाव 100 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। इस आधार पर अगर औसतन 2.75 किलो का एक मुर्गा बिकता है, तो 2000 मुर्गों की खेप से करीब 5.5 लाख रुपये की सकल आय होती है। वहीं जब मुर्गों की संख्या 2500 तक पहुंचती है, तो यह कमाई बढ़कर लगभग 6.8 लाख रुपये हो जाती है।

फार्म से सीधी बिक्री, बाजार का झंझट खत्म

संजीत कुमार को अपनी तैयार खेप बेचने के लिए कभी स्थानीय बाजार या मंडियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। उनके मुर्गों की गुणवत्ता इतनी अच्छी रहती है कि बड़े व्यापारी सीधे उनके फार्म पर पहुंचकर पूरी गाड़ी लोड कराकर ले जाते हैं। फार्म से ही सीधी बिक्री होने के कारण परिवहन खर्च, समय और बिचौलियों का कमीशन पूरी तरह बच जाता है। यह व्यवस्था न केवल उनके मुनाफे को बढ़ाती है, बल्कि उन्हें तनावमुक्त कारोबारी माहौल भी देती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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