होम लोन की ईएमआई से परेशान हैं? इन आसान तरीकों से बचा सकते हैं लाखों रुपये का ब्याज व्यापार एक महीने पहले 69
घर का सपना पूरा करने के लिए होम लोन लेते समय सिर्फ मासिक किश्त नहीं, बल्कि ब्याज दरों और अन्य वित्तीय पहलुओं पर बारीकी से ध्यान देना जरूरी है। यहाँ कुछ स्मार्ट सुझाव दिए गए हैं जो आपको लंबी अवधि में बड़ा आर्थिक लाभ दे सकते हैं।

ब्याज दरों के गणित को समझें

ज्यादातर लोग घर खरीदने के उत्साह में होम लोन के लिए बैंक का चुनाव करते समय केवल मासिक किश्त यानी ईएमआई पर ध्यान केंद्रित करते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि होम लोन आमतौर पर 20 से 30 साल की लंबी अवधि के लिए लिए जाते हैं, ऐसे में ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत या 0.50 प्रतिशत का छोटा सा अंतर भी भविष्य में लाखों रुपये की बचत या अतिरिक्त बोझ का कारण बन सकता है। इसलिए लोन लेते समय ब्याज दर को सबसे महत्वपूर्ण पैमाना मानना चाहिए।

क्रेडिट स्कोर की अहमियत

बैंक और वित्तीय संस्थान आपके लोन आवेदन को मंजूर करने से पहले क्रेडिट स्कोर की जांच करते हैं। यह स्कोर आपकी वित्तीय विश्वसनीयता का पैमाना है। यदि आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है और आपने पुराने कर्ज या क्रेडिट कार्ड के बिल समय पर चुकाए हैं, तो आप बेहतर ब्याज दरों के लिए मोलभाव कर सकते हैं। अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करते रहें और यदि उसमें कोई त्रुटि हो, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं।

डाउन पेमेंट बढ़ाकर ब्याज कम करें

कई बार बैंक आपकी पात्रता के आधार पर बड़ी लोन राशि का प्रस्ताव देते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आपको उतनी बड़ी राशि का ही कर्ज लेना चाहिए। यदि आप अधिक डाउन पेमेंट का भुगतान करते हैं, तो लोन की कुल राशि कम हो जाती है। इससे बैंक का जोखिम घटता है और आपका लोन-टू-वैल्यू अनुपात भी बेहतर होता है। कम लोन राशि लेने से न केवल मूलधन जल्दी खत्म होता है, बल्कि कुल ब्याज का भुगतान भी काफी कम हो जाता है।

तुलना और बातचीत का रखें ध्यान

जैसे घर चुनने के लिए आप कई विकल्पों को देखते हैं, ठीक वैसे ही लोन लेने से पहले विभिन्न बैंकों के ऑफर की तुलना करना अनिवार्य है। हर बैंक की ब्याज दरें, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शर्तें अलग हो सकती हैं। यदि आपका रिकॉर्ड अच्छा है, तो बैंक से बेहतर ब्याज दर के लिए बात करने में हिचकिचाएं नहीं। सही बातचीत आपके लिए लाखों रुपये की बचत करवा सकती है।

लोन लेने के बाद भी सतर्क रहें

लोन पास हो जाने के बाद भी अपनी जिम्मेदारी खत्म न समझें। समय-समय पर बाजार की ब्याज दरों की समीक्षा करते रहें। यदि कहीं और बेहतर ब्याज दर मिल रही है या आपके वर्तमान बैंक की किसी नई स्कीम से फायदा हो सकता है, तो आप अपने लोन को ट्रांसफर कराने या पुनः समझौता करने पर विचार कर सकते हैं। यह छोटी सी समझदारी लंबी अवधि में आपकी जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को काफी हद तक हल्का कर सकती है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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