दादा उमेश प्रसाद सिंह की दूसरी पुण्यतिथि पर भावुक हुआ वैभव सूर्यवंशी का परिवार, सामने आईं अनदेखी बचपन की तस्वीरें बिहार एक घंटा पहले 2
क्रिकेट की दुनिया में चमक रहे युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी के दादा की दूसरी पुण्यतिथि पर परिवार ने उन्हें याद किया। इस मौके पर वैभव के बचपन की कुछ खास तस्वीरें साझा की गई हैं, जो उनके दादा के साथ उनके गहरे लगाव को बयां करती हैं।

यादों के साये में बीता दिन

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी आज देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उनकी इस कामयाबी और चमक-धमक वाली जिंदगी के पीछे एक गहरा पारिवारिक आधार है, जिसे उनके परिजन आज भी उतनी ही शिद्दत से संजोए हुए हैं। बीते बुधवार, 29 जुलाई को वैभव के दादा स्वर्गीय उमेश प्रसाद सिंह की दूसरी पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर उनके पैतृक आवास पर एक भावुक माहौल देखा गया, जहां परिवार ने उन्हें नमन किया। इस दिन की सबसे खास बात वह पुरानी तस्वीर रही, जिसमें नन्हे वैभव अपने दादा की गोद में खेलते हुए नजर आ रहे हैं। यह महज एक फोटो नहीं है, बल्कि उस स्नेह और संस्कार का प्रतीक है जिसने एक खिलाड़ी के रूप में वैभव के व्यक्तित्व की नींव रखी।

श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

स्वर्गीय उमेश प्रसाद सिंह का देहावसान 29 जुलाई 2024 को हुआ था। उनका जन्म 3 अक्टूबर 1961 को हुआ था। उनकी दूसरी पुण्यतिथि के मौके पर समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड अंतर्गत मोतीपुर स्थित घर पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। वैभव के चाचा राजीव सूर्यवंशी और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। चूँकि वैभव इस समय विदेश दौरे पर हैं और अपने क्रिकेट करियर के सिलसिले में व्यस्त हैं, इसलिए वे निजी तौर पर इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए। हालांकि, परिवार का कहना है कि वे अपने दादा के सिद्धांतों और उनकी सीख को हमेशा अपने साथ रखते हैं।

शिक्षक के रूप में पहचान और विरासत

स्वर्गीय उमेश प्रसाद सिंह पेशे से एक शिक्षक थे और मोतीपुर गांव के एक सम्मानित निवासी के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों को सर्वोपरि रखा। उनके दो बेटे हैं, बड़े संजीव सूर्यवंशी और छोटे राजीव सूर्यवंशी। आज संजीव सूर्यवंशी के पुत्र वैभव सूर्यवंशी पूरे विश्व में अपनी बैटिंग और खेल कौशल से ख्याति बटोर रहे हैं। परिवार के करीबी लोगों का मानना है कि दादाजी का सपना था कि उनका पोता अपनी कड़ी मेहनत के दम पर एक बड़ी पहचान हासिल करे। वे हमेशा अपने बच्चों और पोतों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित किया करते थे।

दादा की प्रेरणा आज भी साथ

परिजनों ने साझा किया कि भले ही आज दादा उनके बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन वैभव की हर उपलब्धि में उनका आशीर्वाद स्पष्ट रूप से महसूस होता है। वैभव की लगातार बढ़ती सफलता को देखकर पूरा परिवार गर्व महसूस करता है और उन्हें विश्वास है कि आज यदि दादाजी जीवित होते, तो वे सबसे ज्यादा गौरवान्वित होते। केवल परिवार ही नहीं, बल्कि उनके गांव और आसपास के इलाकों में भी आज उन्हें याद कर लोग भावुक हो उठे। उमेश प्रसाद सिंह ने जिस सादगी और अनुशासन के साथ जीवन व्यतीत किया, उसका असर वैभव के खेल और उनके व्यवहार में साफ झलकता है।

बिहार का गौरव बना एक होनहार युवा

वैभव सूर्यवंशी की सफलता ने समस्तीपुर जिले और पूरे बिहार का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऊंचा किया है। एक छोटे से गांव से निकलकर दुनिया की बड़ी क्रिकेट लीग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाना हर किसी के लिए मिसाल है। वैभव की मेहनत और लगन ने युवाओं को प्रेरित किया है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो बड़े लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं है। उनके दादा का दिया हुआ संस्कार ही है कि आज वैभव इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है। यह दूसरी पुण्यतिथि परिवार के लिए एक बार फिर से यादों के झरोखों में जाकर उस अनमोल रिश्ते को याद करने का दिन रही, जिसने एक शानदार खिलाड़ी को तराशने में मदद की।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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