बिहार
2 घंटे पहले
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पटना के महावीर मंदिर में एक नई शुरुआत
पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक नई और विशेष व्यवस्था शुरू की गई है। अब मंदिर के परिसर में भक्तों को भगवान हनुमान के साथ-साथ आरोग्य और स्वास्थ्य के देवता भगवान धन्वन्तरि का भी सानिध्य प्राप्त होगा। हाल ही में मंदिर परिसर के भीतर पूरी तरह से वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ भगवान धन्वन्तरि की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे जो इस नई परंपरा के साक्षी बने। ऐसी मान्यता है कि भगवान धन्वन्तरि की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलती है और वह एक निरोगी जीवन व्यतीत करता है।
प्रतिमा की स्थापना और विशेषता
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, भगवान धन्वन्तरि की प्रतिमा को मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित किया गया है। यह प्रतिमा वहां पहले से विराजमान माता शबरी और भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियों के बीच स्थापित की गई है। मूर्ति निर्माण की बात करें तो इसे दक्षिण भारत से लाए गए एक विशेष काले पत्थर से तराशा गया है। लगभग पांच फीट ऊंची यह प्रतिमा बेहद आकर्षक और पारंपरिक धार्मिक शैली में निर्मित है। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से ही अब आम श्रद्धालुओं के लिए भगवान धन्वन्तरि के दर्शन के द्वार खोल दिए गए हैं। अब भक्त यहां आकर अपने परिवार की सुख-शांति और सदस्यों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर सकेंगे। विशेष रूप से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों या सर्जरी के दौर से गुजर रहे परिवारों के लिए यह स्थान आस्था का बड़ा केंद्र बनेगा।
धार्मिक महत्व और स्वरूप
सनातन धर्म में भगवान धन्वन्तरि को भगवान विष्णु का ही एक दिव्य अवतार माना गया है। उन्हें आयुर्वेद का जनक होने का गौरव प्राप्त है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब धन्वन्तरि प्रकट हुए थे, तब उनके हाथों में अमृत कलश और आयुर्वेद का गूढ़ ज्ञान था। यही कारण है कि आयुर्वेद के क्षेत्र से जुड़े वैद्य, चिकित्सक और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता उन्हें अपना आराध्य मानते हैं। प्रतिमा के स्वरूप में भगवान धन्वन्तरि को अमृत कलश, औषधि, शंख और चक्र के साथ दर्शाया गया है, जो लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य के प्रतीक हैं।
पूजा और अनुष्ठान का समय
यूं तो भगवान धन्वन्तरि की पूजा पूरे वर्ष कभी भी की जा सकती है, लेकिन हिंदू कैलेंडर के अनुसार धनतेरस के दिन उनकी आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। इसके अलावा कई श्रद्धालु अपने घरों में होने वाले ऑपरेशन या किसी बड़ी सर्जरी से पहले और बाद में भी इनका आशीर्वाद लेने मंदिर पहुंचते हैं। नए अस्पताल या किसी चिकित्सा क्लिनिक की शुरुआत के समय भी इनकी पूजा को अत्यंत शुभ माना जाता है।
वैदिक अनुष्ठान और गणमान्य हस्तियां
भगवान धन्वन्तरि की प्रतिमा का प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान बेहद गरिमामयी ढंग से संपन्न हुआ। इस संपूर्ण धार्मिक प्रक्रिया का संचालन प्रमुख वैदिक पुरोहित सतेन्द्र पांडेय, पंडित कमलाकांत ओझा और आचार्य पंडित भावनाथ झा द्वारा किया गया। मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय कुमार इस अनुष्ठान के दौरान यजमान की भूमिका में रहे। कार्यक्रम के दौरान मंदिर के अधीक्षक के. सुधाकरण सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और मंदिर के सेवादार उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़ाव
गौरतलब है कि महावीर मंदिर ट्रस्ट केवल पूजा-अर्चना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्थान स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभाता है। ट्रस्ट की ओर से महावीर कैंसर संस्थान, महावीर आरोग्य संस्थान, महावीर नेत्रालय, महावीर वात्सल्य अस्पताल और महावीर सीनियर सिटीजन हॉस्पिटल जैसे कई बड़े स्वास्थ्य संस्थानों का संचालन किया जाता है। इन अस्पतालों में राज्य और देश के अन्य हिस्सों से आए मरीज अपनी गंभीर बीमारियों का उपचार कराते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में ही भगवान धन्वन्तरि की स्थापना एक अत्यंत सार्थक कदम माना जा रहा है। अब अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन और श्रद्धालु भगवान धन्वन्तरि के चरणों में आकर अपने प्रियजनों के शीघ्र स्वस्थ होने, मानसिक शांति और दीर्घायु की प्रार्थना कर सकेंगे।
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