बिहार में बनेंगे 3 नए रिवरफ्रंट एक्सप्रेस-वे, 220 KM का 4-लेन हाईवे बदल देगा इन इलाकों की सूरत बिहार 59 मिनट पहले 4
बिहार सरकार ने गंगा और गंडक नदी के किनारे कुल 220 किलोमीटर लंबे तीन नए 4-लेन रिवरफ्रंट एक्सप्रेस-वे बनाने का खाका तैयार किया है। पीपीपी मॉडल पर बनने वाले ये हाईवे राज्य को सीधे यूपी के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जोड़ेंगे।

बिहार में सड़क बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के लिहाज से एक बड़े बदलाव की नींव रखी जा रही है। राज्य सरकार ने गंगा और गंडक नदी के किनारे बसे दियारा क्षेत्रों की तस्वीर बदलने के मकसद से तीन नए 4-लेन रिवरफ्रंट एक्सप्रेस-वे बनाने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। करीब 220 किलोमीटर की कुल लंबाई वाले ये तीनों एक्सप्रेस-वे केवल सड़कें भर नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें राज्य की अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

खास बात यह है कि इन परियोजनाओं को राज्य सरकार पूरी तरह अपने संसाधनों के बल पर आगे बढ़ा रही है। पथ निर्माण विभाग की नोडल एजेंसी बिहार राज्य पथ विकास निगम ने डीपीआर तैयार करने, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी से जुड़े कामों के लिए टेंडर भी जारी कर दिया है। कंसल्टेंसी एजेंसी के चयन के लिए 15 जून तक की समय-सीमा रखी गई है।

12 महीने में तैयार होगा खाका, पीपीपी मॉडल पर निर्माण

एक रिपोर्ट के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनी गई एजेंसियां अगले 12 महीनों के भीतर सभी तकनीकी पहलुओं और सर्वे का काम निपटाएंगी। इसके बाद ही निर्माण की वास्तविक लागत तय हो पाएगी। पूरी परियोजना पीपीपी मॉडल पर आधारित रहेगी, जिसके तहत निर्माण करने वाली निजी कंपनी अपने ही खर्च पर हाईवे का डिजाइन और निर्माण करेगी और बाद में टोल टैक्स वसूल कर अपनी लागत वापस लेगी।

पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र के मुताबिक बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए हर क्षेत्र को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से जोड़ना जरूरी है, और सरकार ने अपने संसाधनों से इसका रास्ता साफ कर दिया है।

इन तीन रूटों पर दौड़ेगी विकास की रफ्तार

विश्वामित्र पथ (मनेर से बक्सर – 90 किमी)

यह एक्सप्रेस-वे पटना के मनेर से शुरू होकर आरा होते हुए बक्सर तक पहुंचेगा। बक्सर में इसका संपर्क सीधे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और जनेश्वर मिश्र पुल से हो जाएगा। इसके बनने के बाद बिहार से लखनऊ और दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों का समय काफी घटेगा और सफर आसान हो जाएगा।

गंगा अंबिका पथ (बिदुपुर से दिघवारा – 56 किमी)

यह हाईवे बिदुपुर से सोनपुर होते हुए दिघवारा तक बनाया जाएगा। यह जेपी सेतु, महात्मा गांधी सेतु और कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स-लेन सेतु को आपस में बेहतरीन कनेक्टिविटी देगा। इससे राजधानी पटना पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा और प्रस्तावित इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचना बेहद सुविधाजनक हो जाएगा।

नारायणी पथ (सोनपुर से गोपालगंज – 74 किमी)

गंडक नदी के किनारे सोनपुर के दरिहारा से गोपालगंज के डुमरिया तक बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे पटना को सीधे देश के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (गुजरात-असम रोड) से जोड़ देगा। इससे सारण और गोपालगंज के सुदूर दियारा इलाकों में व्यापार और उद्योगों को नई रफ्तार मिलेगी।

दियारा की जमीन और निजी निवेश क्यों है सरकार का मास्टरस्ट्रोक?

नदियों के किनारे और दियारा इलाकों में एक्सप्रेस-वे बनाने का यह फैसला बेहद सोच-समझकर लिया गया रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिसके दो बड़े फायदे गिनाए जा रहे हैं।

बिहार में किसी भी बड़ी परियोजना के अटकने की सबसे बड़ी वजह आमतौर पर जमीन अधिग्रहण को लेकर उठने वाला विवाद होता है। चूंकि ये एक्सप्रेस-वे रिहायशी इलाकों से दूर नदियों के किनारे बनाए जाएंगे, इसलिए भूमि अधिग्रहण के दौरान किसी बड़े विवाद या विरोध का सामना करने की आशंका कम रहेगी।

पीपीपी मॉडल पर आधारित होने के कारण राज्य सरकार को शुरुआत में भारी पूंजी निवेश नहीं करना पड़ेगा। निजी कंपनियां खुद पैसा लगाएंगी, जिससे राज्य के बाकी विकास कार्यों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

यूपी के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और देश के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से सीधे जुड़ने के बाद बिहार का यह रिवरफ्रंट एक्सप्रेस-वे मॉडल आने वाले समय में राज्य के औद्योगिक और व्यापारिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!