बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनना अब और चुनौतीपूर्ण: नई भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा अनिवार्य, जानें पूरा नियम बिहार एक घंटा पहले 1
बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए नया ड्राफ्ट तैयार किया गया है। अब नेट या पीएचडी के बावजूद उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

बिहार असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के नए नियम

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। राज्य के विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर एक नया ड्राफ्ट सामने आया है। इस बदलाव के तहत, अब केवल नेट या पीएचडी पास कर लेना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आवेदकों को एक विशेष लिखित परीक्षा में भी सफल होना पड़ेगा।

लिखित परीक्षा और इंटरव्यू का नया ढांचा

नए ड्राफ्ट के अनुसार, स्थायी नियुक्तियों के लिए 175 अंकों की एक लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा के पैटर्न को समझने के लिए इसे चार भागों में बांटा गया है:

  • 20 प्रश्न: प्रत्येक 1 अंक का।
  • 15 प्रश्न: प्रत्येक 2 अंक का।
  • 15 प्रश्न: रीजनिंग और एप्टीट्यूड पर आधारित, प्रत्येक 3 अंक का।
  • 10 प्रश्न: प्रत्येक 8 अंक का।

लिखित परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार होगी। इसके बाद सफल अभ्यर्थियों को 25 अंकों के साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। यह इंटरव्यू दो चरणों में होगा, जिसमें 13 अंक शिक्षण शैली (टीचिंग स्टाइल) के मूल्यांकन के लिए और 12 अंक विषय से संबंधित ज्ञान के लिए निर्धारित किए गए हैं।

शैक्षणिक योग्यता और आवेदन शर्तें

इस पद के लिए आवेदन हेतु अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ पोस्ट ग्रेजुएट होना अनिवार्य है। साथ ही, उम्मीदवार का NET, BET या PhD में से किसी एक अर्हता को पूरा करना आवश्यक है।

आयु सीमा को लेकर उठ रहे सवाल

नए ड्राफ्ट में आवेदकों के लिए आयु सीमा 21 वर्ष से 40 वर्ष तय की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में नियुक्तियों की धीमी गति और उच्च शिक्षा प्राप्त करने में लगने वाले समय को देखते हुए अधिकतम आयु सीमा पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। जानकारों का सुझाव है कि जब तक भर्तियां नियमित रूप से नहीं होतीं, तब तक उम्र सीमा को बढ़ाना छात्रों के हित में होगा।

अगले कदम

राज्य के लोक भवन ने इस ड्राफ्ट पर सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से 10 दिनों के भीतर सुझाव और मंतव्य मांगे हैं। वर्ष 2025 में जारी किए गए पुराने ड्राफ्ट को वापस ले लिया गया है। विभिन्न पक्षों से फीडबैक मिलने के बाद ही नियुक्ति प्रक्रिया का अंतिम ड्राफ्ट लागू किया जाएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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