राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव: 6 चरणों में मतदान की तैयारी, हाई कोर्ट के आदेश के बाद सक्रिय हुआ आयोग राजस्थान एक महीने पहले 31
राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकायों के चुनाव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, जिसे लेकर राज्य चुनाव आयोग ने छह चरणों में मतदान कराने की योजना बनाई है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 20 जुलाई तक चुनाव कार्यक्रम पेश करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

चुनाव की तैयारियां और मतदान की प्रक्रिया

राजस्थान में पंचायत और शहरी निकायों के चुनावों का बिगुल जल्द बज सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इन चुनावों को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए अपनी कमर कस ली है। ताजा जानकारी के अनुसार, मतदाता सूचियों को अपडेट करने का कार्य लगभग अंतिम चरणों में है और इसके लिए संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी गई है। आधिकारिक सूत्रों से मिले संकेतों के आधार पर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य में पंचायत और स्थानीय निकायों के चुनाव कुल 6 चरणों में आयोजित किए जा सकते हैं।

ईवीएम और बैलेट पेपर का इस्तेमाल

चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के मुताबिक, मतदान के लिए मिश्रित प्रणाली अपनाई जाएगी। जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्यों का चुनाव EVM के जरिए कराया जाएगा। दूसरी ओर, जमीनी स्तर पर पंच और सरपंचों के चुनाव के लिए पुराने और भरोसेमंद तरीके यानी बैलेट पेपर का उपयोग होगा। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिलों में पर्याप्त मात्रा में मतपेटियां पहले से ही उपलब्ध हैं। वहीं, EVM मशीनों को मध्य प्रदेश से मंगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन मशीनों के संचालन और तकनीकी पहलुओं को संभालने के लिए जिला स्तर के मास्टर ट्रेनर्स को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

हाई कोर्ट की सख्ती और डेडलाइन

चुनावों में हो रही देरी को देखते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग 20 जुलाई तक चुनाव का पूरा कार्यक्रम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें। कोर्ट ने यह भी कहा है कि चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देने से पहले ओबीसी आयोग के साथ विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए। इसके अलावा, वार्डों के परिसीमन के लिए लॉटरी किस तारीख को निकाली जाएगी और चुनाव की घोषणा कब की जाएगी, इसका ब्यौरा भी देना होगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तय समय-सीमा का पालन न करने पर नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का आदेश दिया।

देरी की वजह और ओबीसी आरक्षण का पेंच

गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने 14 नवंबर, 2025 को आदेश दिया था कि पंचायत और नगरपालिका चुनाव 15 अप्रैल, 2026 तक संपन्न हो जाने चाहिए। हालांकि, डेडलाइन चूकने के बाद याचिकाकर्ताओं ने अवमानना याचिकाएं दाखिल कीं। इसके बाद 22 मई, 2026 को अदालत ने चुनाव कराने के लिए 31 जुलाई, 2026 तक की अंतिम मोहलत दी थी। इन चुनावों में देरी का मुख्य कारण ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण कोटा से संबंधित सिफारिशों का न मिल पाना बताया जा रहा है। सरकार ने कोर्ट को सूचित किया है कि ओबीसी आयोग 14 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगा और 31 अगस्त तक आरक्षण की प्रक्रिया को पूरी तरह से अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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