उपनाम: अरावली संरक्षण
खुद बोल नहीं सकते, लेकिन बेजुबान वन्यजीवों की आवाज बने जोधपुर के मूक-बधिर फरसाराम
जोधपुर के बुधनगर निवासी मूक-बधिर फरसाराम पिछले 12 वर्षों से घायल वन्यजीवों के लिए मसीहा बने हुए हैं। सिलाई का काम करने वाले फरसाराम अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इन बेजुबानों के इलाज पर खर्च करते हैं।
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2 घंटे पहले