भद्रेश्वर महादेव: सदियों पुराना यह शिवालय बना अनसुलझी पहेली, हर वर्ष आधा इंच जमीन में समाता मंदिर राजस्थान एक महीने पहले 46
राजस्थान के पाली जिले में जवाई बांध के कैचमेंट क्षेत्र में स्थित 11वीं सदी का भद्रेश्वर महादेव मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं और रहस्यमयी अस्तित्व के लिए जाना जाता है। बांध बनने के बाद से यह प्राचीन शिवालय धीरे-धीरे पानी और मिट्टी में समाता जा रहा है।

राजस्थान के पाली जिले में जवाई बांध के कैचमेंट क्षेत्र में बसा 11वीं सदी का यह ऐतिहासिक भद्रेश्वर महादेव मंदिर आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। अपनी पौराणिक मान्यताओं और रहस्यमयी अस्तित्व के चलते यह शिवालय दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।

पांडवों से जुड़ी पौराणिक मान्यता

स्थानीय जनश्रुति के अनुसार अज्ञातवास के समय पांडवों ने इसी स्थान पर कुछ समय व्यतीत किया था। माना जाता है कि इसी वजह से इस शिवालय का नाम भद्रेश्वर पड़ा। सदियों पुराना यह मंदिर आज भी आस्था का केंद्र बना हुआ है और दूर-दराज से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

बांध बनने के बाद बदले हालात

जवाई बांध के निर्माण के बाद से यह प्राचीन मंदिर निरंतर पानी और मिट्टी में समाता चला जा रहा है। समय के साथ इसकी संरचना का बड़ा हिस्सा जलमग्न होता गया है, जिससे इसका मूल स्वरूप अब पहले जैसा दिखाई नहीं देता।

गर्मियों में दिखता है केवल शिखर

आज स्थिति यह है कि गर्मी के मौसम में जब बांध का पानी सूख जाता है, तब केवल मंदिर का अंतिम शिखर ही नजर आता है। इसी शिखर को देखकर स्थानीय लोग बांध में जलस्तर का अनुमान लगाते हैं। हर साल जमीन में धंसता यह शिवालय आज भी एक अनसुलझे रहस्य की तरह बना हुआ है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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