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एक घंटा पहले
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पाकिस्तान में लश्कर के बड़े कमांडर का अंत
भारत के खिलाफ साजिशें रचने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक बड़े आतंकी और कमांडर कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज की मौत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो गई है। वह लंबे समय से लश्कर की गतिविधियों में सक्रिय था और हाफिज सईद का बेहद करीबी माना जाता था। उसकी मौत उस वक्त हुई जब वह इस्लामाबाद की प्रसिद्ध कुबा मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए पहुँचा था। इस घटना के बाद से ही इलाके में हड़कंप मच गया है और उसकी मौत की वजहों को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
सीसीटीवी फुटेज में सामने आई पूरी घटना
कारी सईद की मौत की घटना पास ही लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि कारी सईद एक बैग लेकर मस्जिद के परिसर में प्रवेश करता है। वह बहुत सामान्य दिख रहा था और अंदर जाने के बाद उसने अपना बैग अपने साथ आए एक अन्य व्यक्ति को सौंप दिया। इसके बाद वह नमाज पढ़ने से पहले की प्रक्रिया यानी वुजू करने के लिए आगे बढ़ा। वुजू करने के बाद उसने अपने साथी से अपना बैग वापस लिया और मस्जिद के मुख्य हॉल की ओर बढ़ने वाली सीढ़ियों पर चढ़ने लगा। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ ही क्षणों में स्थितियां पूरी तरह बदल गईं।
चप्पल उतारते समय अचानक गिरी मौत
वीडियो फुटेज के अनुसार, मुख्य हॉल के पास पहुँचने के बाद कारी सईद अपनी चप्पल उतारने के लिए नीचे बैठा। जैसे ही वह बैठने की प्रक्रिया में था, वह अचानक बेदम होकर जमीन पर लुढ़क गया। उसे गिरते देख उसके साथ मौजूद अन्य लश्कर कैडर तुरंत उसकी तरफ भागे और उसे संभालने की कोशिश की। जब वह सांस नहीं ले रहा था, तो वहाँ मौजूद लोगों ने उसे बचाने के लिए सीपीआर (CPR) देने का प्रयास किया। तमाम कोशिशों के बाद भी उसे होश नहीं आया और उसकी स्थिति गंभीर बनी रही। अंत में उसे अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल, उसकी मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
1990 से हाफिज सईद का दाहिना हाथ
कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज कोई मामूली आतंकी नहीं था। वह साल 1990 से ही लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद के साथ जुड़ा हुआ था। उसे हाफिज सईद का बेहद खास और विश्वसनीय कमांडर माना जाता था। कारी सईद की आतंकी गतिविधियों में भूमिका बहुत गहरी थी और वह संगठन की कार्यप्रणाली को बहुत बारीकी से समझता था। वर्ष 2017 तक वह सीधे तौर पर आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा और उसका मुख्य काम लश्कर के लिए नए युवाओं को आतंकवाद की राह पर लाने और उन्हें संगठन में भर्ती करने का था।
प्रशासनिक नेटवर्क और आर्थिक मदद का जिम्मा
बाद के वर्षों में लश्कर-ए-तैयबा ने कारी सईद को संगठन की प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपीं। उसे दक्षिण पंजाब के मुख्य इलाकों जैसे मुल्तान, बहावलपुर और डेरा गाजी खान के संचालन का जिम्मा दिया गया था। उसकी जिम्मेदारी इन क्षेत्रों के उन आतंकियों के परिवारों तक हर महीने आर्थिक मदद पहुँचाने की थी, जो भारत में आतंकी गतिविधियों के दौरान मारे गए थे। साथ ही, इन जिलों से संबंधित आतंकियों का पूरा रिकॉर्ड रखना और उनकी सूची तैयार करना भी उसके कार्यक्षेत्र में शामिल था। संक्षेप में कहें तो, जो कारी सईद कभी आतंकियों की भर्ती के लिए जाना जाता था, वह बाद में लश्कर के प्रशासनिक और वित्तीय नेटवर्क की रीढ़ बन गया था। इस अचानक हुई मौत ने अब लश्कर-ए-तैयबा के भीतर खलबली मचा दी है।
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