लाल किले में एक नहीं होती हैं 3 भव्य रामलीलाएं, तकनीक से लेकर कलाकारों तक, जानें तीनों में क्या है अंतर दिल्ली 4 घंटे पहले 9
दिल्ली के लाल किले में आयोजित होने वाली तीन अलग-अलग रामलीलाओं की खासियतें जानें, जो परंपरा, सितारों के अभिनय और आधुनिक AI तकनीक के बेजोड़ संगम के लिए प्रसिद्ध हैं।

दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला मैदान हर साल शारदीय नवरात्रि के दौरान एक अनोखे उत्सव और भक्ति के रंग में रंग जाता है। इस दौरान यहाँ का नज़ारा देखने लायक होता है, क्योंकि यहाँ देश की सबसे प्रसिद्ध रामलीलाओं का मंचन किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लाल किला परिसर में केवल एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग भव्य रामलीलाओं का आयोजन एक साथ होता है? जी हां, यह बात बहुत से लोगों को हैरान कर सकती है, लेकिन लाल किले के विशाल प्रांगण में तीन अलग-अलग कमेटियों द्वारा भव्य स्तर पर रामलीला का मंचन किया जाता है।

इन तीनों ही रामलीलाओं के अपने अलग पंडाल सजते हैं, अपने लाउडस्पीकर बजते हैं और तीनों की अपनी एक अनोखी विशेषता है। अक्सर भीड़ इतनी ज़्यादा होती है कि दर्शक एक पंडाल से निकलकर दूसरे पंडाल में चले जाते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता कि वे दूसरी रामलीला के गवाह बन चुके हैं। इन तीनों रामलीलाओं में लव कुश रामलीला, श्री धार्मिक लीला और नव श्री धार्मिक लीला कमेटी शामिल हैं। इस बार के नवरात्रि में अगर आप दिल्ली में हैं या यहाँ आने की योजना बना रहे हैं, तो आपको लाल किले की इन तीनों रामलीलाओं के रंग और उनकी विभिन्नताओं को ज़रूर देखना चाहिए। आइए विस्तार से जानते हैं कि इन तीनों रामलीलाओं में क्या-क्या ख़ास है और ये एक-दूसरे से किस तरह अलग हैं।

लव कुश रामलीला: सितारों से सजी और आधुनिक तकनीक वाली रामलीला

लाल किला मैदान की पहली और देश भर में सबसे अधिक चर्चा बटोरने वाली रामलीला है लव कुश रामलीला। यह न केवल दिल्ली में बल्कि पूरे भारतवर्ष में सबसे भव्य, आधुनिक और हाई-टेक रामलीलाओं में शुमार की जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ के मुख्य पात्रों और किरदारों को निभाने के लिए किसी आम कलाकार को नहीं, बल्कि बॉलीवुड, टेलीविजन और राजनीति जगत की बड़ी और जानी-मानी हस्तियों को आमंत्रित किया जाता है। प्रसिद्ध फिल्मी सितारे और चर्चित चेहरे यहाँ मंच पर भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में जीवंत अभिनय करते हैं, जिन्हें देखने के लिए लाखों की संख्या में दर्शकों का हुजूम उमड़ पड़ता है।

इस साल लव कुश रामलीला का भव्य आयोजन 11 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक चलने वाला है, जबकि इसमें रावण दहन का मुख्य कार्यक्रम 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी यानी दशहरा के पावन अवसर पर किया जाएगा।

हर साल की तरह इस बार भी इस रामलीला में कुछ बेहद नया और अनूठा करने की तैयारी की गई है। इस वर्ष का मुख्य आकर्षण यहाँ का विशाल मंच है, जिसे दक्षिण भारत के मदुरै शहर में स्थित प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर बेहद खूबसूरती के साथ तैयार किया जा रहा है। इस भव्य मंच की भव्यता का अंदाजा आप इसके आकार से लगा सकते हैं। यह मंच लगभग 140 से 150 फीट लंबा, 60 फीट चौड़ा और 45 फीट ऊंचा होगा, जो कुल मिलाकर चार मंजिला आकार में दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

इसके साथ ही, तकनीक के दीवानों के लिए भी यहाँ बहुत कुछ ख़ास होने वाला है। इस साल मंचन में निम्नलिखित आधुनिक तकनीकों का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा:

  • AI तकनीक का इस्तेमाल दृश्यों को और अधिक वास्तविक बनाने के लिए किया जा रहा है।
  • 3D मैपिंग के ज़रिये मंच पर अद्भुत और जादुई वातावरण तैयार किया जाएगा।
  • डॉल्बी साउंड सिस्टम की मदद से दर्शकों को बेहतरीन और स्पष्ट आवाज का अनुभव मिलेगा।
  • रंग-बिरंगी और आकर्षक LED लाइट्स पूरे माहौल को भक्तिमय और भव्यता से सराबोर कर देंगी।

इस वर्ष के मंचन में बॉलीवुड और टेलीविजन के करीब 40 प्रमुख कलाकार विभिन्न किरदारों में अपनी कला का जादू बिखेरेंगे। मिली जानकारी के अनुसार, इस बार रावण के दमदार किरदार में राजप्रेमी दिखाई देंगे, जबकि नारद मुनि की भूमिका प्रसिद्ध अभिनेता पेंटल निभाएंगे। इसके अतिरिक्त, केवट के ऐतिहासिक और भावुक किरदार में लोकप्रिय अभिनेता और राजनेता मनोज तिवारी नज़र आने वाले हैं। इस रामलीला की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इसका प्रसारण देश और दुनिया के लगभग 100 प्रमुख चैनलों पर लाइव यानी सीधा प्रसारित किया जाता है।

श्री धार्मिक लीला कमेटी: परंपरा और संस्कृति की ऐतिहासिक धरोहर

अगर आप पारंपरिक रामलीला के शौकीन हैं और भारतीय संस्कृति के पुराने और प्रामाणिक रंग को महसूस करना चाहते हैं, तो लाल किले की श्री धार्मिक लीला कमेटी की रामलीला आपके लिए सबसे बेहतरीन जगह है। यह दिल्ली की सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक रामलीलाओं में से एक मानी जाती है। इसकी शुरुआत वर्ष 1924 में हुई थी और वर्ष 2026 में यह कमेटी अपनी स्थापना और मंचन का 103वां वर्ष मना रही है। एक सदी से भी अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है।

यह ऐतिहासिक रामलीला लाल किला परिसर के भीतर स्थित माधवदास पार्क में आयोजित की जाती है, जो कि पुरानी लाजपत राय मार्केट के ठीक सामने स्थित है। इस वर्ष इसका भव्य आयोजन 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है।

श्री धार्मिक लीला की सबसे बड़ी खासियत इसकी पूरी तरह से पारंपरिक और शास्त्रीय शैली है। यहाँ आज भी पुराने तौर-तरीकों, सुंदर संवाद अदायगी और प्राचीन संगीत की धुन पर रामलीला का मंचन किया जाता है। यहाँ का माहौल पूरी तरह से पारिवारिक होता है, जहाँ लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ शांतिपूर्वक रामलीला का आनंद लेने आते हैं। इस रामलीला परिसर में सजने वाला पारंपरिक जनक बाजार, पुराने तरीके के झूले और खान-पान के स्टॉल दशकों पुरानी यादों को ताज़ा कर देते हैं। इस रामलीला की साख इतनी अधिक है कि देश के बड़े-बड़े राजनीतिक नेता और गणमान्य हस्तियां भी अक्सर यहाँ प्रभु श्री राम की लीला का दर्शन करने और आशीर्वाद लेने पहुँचती हैं। इसके कलाकार भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी रामलीला के मंच से जुड़े मंजे हुए कलाकार होते हैं, जिनकी डायलॉग डिलीवरी और अभिनय कला दर्शकों के दिलों को छू लेती है।

नव श्री धार्मिक लीला कमेटी: आधुनिक प्रयोग और युवा पीढ़ी का संगम

लाल किला मैदान में आयोजित होने वाली तीसरी प्रमुख रामलीला नव श्री धार्मिक लीला कमेटी की है। यह कमेटी मूल रूप से श्री धार्मिक लीला कमेटी से ही अलग होकर अस्तित्व में आई थी। इस रामलीला का आयोजन लाल किला मैदान के प्रसिद्ध 15 August Park में किया जाता है, जो ऐतिहासिक दिगंबर जैन लाल मंदिर और मशहूर चांदनी चौक बाजार के ठीक सामने लाल किले के मुख्य प्रांगण में स्थित है।

यह कमेटी पारंपरिक मर्यादाओं को बनाए रखते हुए मंचन में अत्याधुनिक तकनीकी प्रयोगों को शामिल करने के लिए विशेष रूप से जानी जाती है। इस रामलीला में आपको आधुनिक विज्ञान और तकनीक का एक बेहतरीन समन्वय देखने को मिलता है। इस कमेटी ने अपने लाइट और साउंड सिस्टम के साथ AI तकनीक और विशाल LED स्क्रीन्स का बेहतरीन एकीकरण किया है।

यहाँ तकनीक का इस्तेमाल कुछ इस तरह से किया जाता है जो दर्शकों को हैरान कर देता है। उदाहरण के लिए, जब मंच पर रावण का प्रवेश होता है या कोई रहस्यमयी दृश्य आता है, तो रावण के चेहरे को सीधे दिखाने के बजाय उसकी AI परछाई या डिजिटल रिफ्लेक्शन का उपयोग करके दृश्य में रहस्य और रोमांच पैदा किया जाता है।

इसके अलावा, आज की युवा पीढ़ी यानी Gen Z को आकर्षित करने और उन्हें अपनी जड़ों व भक्ति से जोड़ने के लिए इस रामलीला में कई अनोखी और आधुनिक पहल की गई हैं:

  • यहाँ भजन जैमिंग का आयोजन किया जाता है, जहाँ आधुनिक संगीत वाद्ययंत्रों के साथ भजनों की प्रस्तुति दी जाती है।
  • युवाओं की पसंद को ध्यान में रखते हुए यहाँ भजन क्लबिंग जैसे अभिनव प्रयोग भी किए जाते हैं, जो पारंपरिक भजनों को एक नया और उत्साहजनक रूप प्रदान करते हैं।

इस वर्ष भी 11 अक्टूबर से लाल किले के इस प्रांगण में रामलीलाओं का यह अद्भुत और दिव्य सिलसिला शुरू होने जा रहा है। ऐसे में, यदि आप इस नवरात्रि के दौरान दिल्ली में हैं, तो आप अपनी पसंद और रुचि के अनुसार इनमें से किसी भी रामलीला का हिस्सा बन सकते हैं, या फिर लाल किले में जाकर इन तीनों रामलीलाओं के अलग-अलग और अनूठे स्वरूपों का प्रत्यक्ष अनुभव ले सकते हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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