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4 घंटे पहले
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नवरात्रि का विशेष महत्व और माता का आगमन
हिंदू धर्म में नवरात्रि के नौ दिनों को अत्यंत पवित्र माना गया है। सनातन संस्कृति में साल में चार बार नवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है, जिनमें से अश्विन मास में आने वाली शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। इस दौरान भक्त पूरी श्रद्धा के साथ मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों के दौरान माता भगवती स्वयं पृथ्वी पर अवतरित होती हैं और अपने भक्तों को अपना दिव्य आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत को लेकर भक्तों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
उज्जैन के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य अमर डब्बावाला के अनुसार, इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 11 अक्टूबर को होगा। नवरात्रि का समापन 19 अक्टूबर को होगा और उसके अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों और श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार, नवरात्रि किस वार को शुरू हो रही है, इसी आधार पर माता रानी के वाहन का निर्धारण होता है। चूँकि इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार के दिन चित्रा नक्षत्र में हो रही है, इसलिए मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी।
हाथी की सवारी का आर्थिक महत्व
शास्त्रों में देवी के वाहन के रूप में हाथी का आना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना गया है। ज्योतिषाचार्य अमर डब्बावाला ने बताया कि माता का यह आगमन न केवल सुख और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह आर्थिक उन्नति के लिए भी शुभ संकेत लेकर आता है। इसके अनुसार आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिलेगी। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव की स्थिति भी बनी रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अवधि के दौरान देश की निर्यात नीति पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी, जिससे आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में आसानी हो।
नौ दिनों का अखंड अनुष्ठान
इस वर्ष की शारदीय नवरात्रि पूरे 9 दिन की है, क्योंकि इसमें किसी भी तिथि का क्षय नहीं हो रहा है। तिथि की पूर्णता के कारण यह कालखंड साधना करने वाले साधकों और उपासकों के लिए अत्यंत प्रभावशाली रहेगा। जो भक्त इन नौ दिनों में विशेष अनुष्ठान या कोई नया संकल्प लेना चाहते हैं, उनके लिए यह समय बहुत ही श्रेष्ठ और अनुकूल रहने वाला है। पहले दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी और इसके बाद नौ दिनों तक मां के विभिन्न रूपों की आराधना की जाएगी।
दुर्लभ संयोग और पांच विशेष योग
धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो नवरात्रि के दौरान बनने वाले शुभ योग इस पर्व की महिमा को और अधिक बढ़ा देते हैं। इस वर्ष की नवरात्रि में पांच विशेष योगों का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो इसे और भी अधिक कल्याणकारी बनाता है:
- 14 अक्टूबर को चतुर्थी तिथि के दिन अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है।
- 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि के दिन दो बार सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं।
- 19 अक्टूबर को महाअष्टमी के दिन दो रवि योग का संयोग भी निर्मित हो रहा है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इन विशेष मुहूर्त के दौरान मां दुर्गा की भक्ति के साथ-साथ भूमि, भवन, संपत्ति और नए वाहन की खरीदारी करना भी काफी शुभ माना जाता है। इस अवधि में किए गए शुभ कार्य लंबे समय तक सुखद परिणाम देने वाले होते हैं।
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