बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच को उम्रकैद, समर्थकों में भारी आक्रोश विश्व एक घंटा पहले 2
पाकिस्तान की एक अदालत ने बलोच कार्यकर्ता डॉ. महरंग बलोच और उनके सहयोगियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जिससे बलोचिस्तान में मानवाधिकारों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

अदालत का फैसला और सजा

पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में स्थित ग्वादर की आतंकवाद निरोधी अदालत ने सोमवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रमुख बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. महरंग बलोच को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में उनके कई सहयोगियों को भी दोषी पाया गया है। अदालत ने बलोच यकजहती कमेटी (BYC) से जुड़े नेताओं के खिलाफ आतंकवाद, राजद्रोह और हत्या जैसे गंभीर आरोप तय किए थे। 33 वर्षीय डॉ. महरंग बलोच को मार्च 2025 में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद से ही उनके समर्थक उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे।

न्यायिक प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस फैसले के सामने आने के बाद बलोच संगठनों ने इसे न्यायिक आतंकवाद करार दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान की न्यायपालिका का उपयोग शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यकर्ताओं की आवाज को दबाने के लिए किया जा रहा है। समर्थकों का दावा है कि डॉ. महरंग ने कभी भी किसी हिंसक गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया, बल्कि वे बलोचिस्तान में होने वाली जबरन गुमशुदगियों और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ लड़ रही थीं।

कानूनों के दुरुपयोग का आरोप

मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि पाकिस्तान में सरकार आतंकवाद निरोधी कानूनों का इस्तेमाल अपने आलोचकों को चुप कराने के लिए कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बलोचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय लोगों के अधिकारों की बात करने वालों पर अक्सर राजद्रोह का ठप्पा लगा दिया जाता है। इस जेल की प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता पर भी कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

बढ़ता तनाव और पीओके का संदर्भ

यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब पाकिस्तान के अन्य हिस्सों, विशेषकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ दबाव बढ़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां की जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के लगभग 150 सदस्यों को आतंकवाद निरोधी कानून की फोर्थ शेड्यूल सूची में डाला गया है। इन क्षेत्रों में बिजली और आटे जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान 20 से अधिक लोगों की मौत की खबरें भी सामने आई थीं।

दो दशकों से जारी संघर्ष

बलोच समुदाय और मानवाधिकार संगठन पिछले दो दशकों से बलोचिस्तान में लापता लोगों और मनमानी गिरफ्तारियों के मुद्दे पर सरकार को घेरते रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां हमेशा से इन आरोपों को सिरे से खारिज करती आई हैं। डॉ. महरंग बलोच को मिली इस सजा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की मानवाधिकार नीतियों पर बहस छेड़ दी है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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